Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
Speech

वाणी

450 सूत्र · पृष्ठ 4 / 6

मुँह से एक शब्द गलत निकल जाए तो रामायण होते-होते महाभारत हो जाता है।
वाणी
मधुर शब्दों में कही हुई बात अनेक प्रकार से कल्याण करती है किन्तु वही बात यदि कटु शब्दों में कही जाए तो महान् अनर्थ का कारण बन जाती है।
वाणी
किसी को शोर करते हुए देखें तो समझें उसकी शक्ति कम हो गई हैं।
वाणी
यदि आपके एक शब्द से भी किसी को कष्ट पहुँचता है तो आप अपनी सब भलाई नष्ट हुई समझो।
वाणी
शब्दों का उपयोग कंजूस की भाँति करना चाहिए।
वाणी
शब्दों के माध्यम से पूर्ण की अभिव्यक्ति सम्भव नहीं है।
वाणी
हर आदमी की बात सुनो परन्तु अपनी बात बहुत कम किसी को सुनाओ।
वाणी
जो ज्यादा जानता है वह कम बोलता है और जो ज्यादा बोलता है वह कम जानता है।
वाणी
प्रवचन में जो तुम श्रोताओं से कहते हो, वह अपने से भी कहो।
वाणी
वेशभूषा से विदूषक भी आकर्षण कर लेता है, पर वह स्थायी नहीं वाणी का आकर्षण स्थाई होता है।
वाणी
'बहुभाषिणो न श्रद्धति लोक:' संक्षिप्त और सारयुक्त वचन अच्छे वक्ता का लक्षण है, बहुत बोलने वाले का लोग विश्वास नहीं करते हैं।
वाणी
नर्स की सहानुभूतिपूर्ण वाणी रोगी को स्वस्थ करती है, कर्कश वाणी रोग बढ़ाती है।
वाणी
अध्यापक की क्रोध भरी फटकार विद्यार्थी की मेधा को कुंठित करती है।
वाणी
लिखे हुए शब्द क्रान्ति नहीं लाते बोले हुए शब्द क्रान्ति लाते हैं।
वाणी
जीवन में ७५ प्रतिशत से अधिक कार्य बोलकर ही करने है, अच्छा सेल्समेन का अच्छा वक्ता होना आवश्यक है। सफल वक्ता आत्म विश्वास से भरा होता है।
वाणी
दर्शकों को बताइये कि आप क्या कहने जा रहे हैं, उसे कहिये और फिर उन्हें बताइये कि आपने क्या कहा है।
वाणी
अपनी भाषा पर जरा ध्यान दीजिए अन्यथा आप अपना भाग्य खराब कर लेंगे।
वाणी
नाप-तौल कर बोलें और कम से कम शब्दों में अपनी बात को रखें, शब्दों का चयन भी सही हो।
वाणी
'ना' कहने से कई तरह की परेशानी से आप बच सकेंगे। समय भी बचेगा और सम्बन्ध भी मधुर रहेंगे।
वाणी
इंसान के द्वारा उपयोग में आने वाले सभी शब्दों में सबसे जादुई और करिश्माई शब्द है 'धन्यवाद'। शिक्षा, चिकित्सा आदि में पैसे से ज्यादा महत्त्व धन्यवाद का होता है।
वाणी
अगर आपका कोई कार्य रुक गया है या नहीं हो रहा है तो उस कार्य को करवाने की शक्ति इस 'धन्यवाद' शब्द में है।
वाणी
परोक्ष-अपरोक्ष रूप में सहयोग करने वाले को 'धन्यवाद' देना नैतिक जिम्मेदारी है।
वाणी
जो काम पैसे से नहीं हो सकता वह काम इस जादुई शब्द 'धन्यवाद' से संभव है।
वाणी
जो पुरुष दूसरों की शान्ति की परवाह न करके किसी भी क्षम्य बात को अशान्ति से कहता है, वह निर्दयी पुरुष है, उसका मनोबल हीन हो जाता है और स्वयं अशान्त रहता है, अत: प्रत्येक बात को सावधानी से दूसरों की शान्ति की रक्षा का विचार करते हुए रखो।
वाणी
मेहमानों से या मोबाइल पर संक्षेप में बात करें।
वाणी
बहस में अक्सर वही जीतता है जो ऊँचा बोल पाता है।
वाणी
वाचालता अल्पज्ञता की पहचान है।
वाणी
मधुरवाणी शत्रु को भी मित्र बनाती है।
वाणी
इंसान की तरह बोलना न आये तो जानवर की तरह मौन रहो।
वाणी
सर्वाधिक धारा प्रवाही वक्ता अथवा सर्वाधिक उपयुक्त तार्किक सदैव न्याय पूर्ण विचारक नहीं होते हैं।
वाणी
कठोर तर्क प्रस्तुत करते समय कोमल शब्दों का प्रयोग करें।
वाणी
जो वाक्य बिजली के तार की तरह हृदय को धक्का न दे सके उसे निष्फल जानो।
वाणी
दूसरों को सुनाने के लिए अपनी आवाज ऊँची मत करो, बल्कि अपना व्यक्तित्व इतना ऊँचा बनाओ कि आपको सुनने के लिए लोग निवेदन करें।
वाणी
कड़क लफ्जों में हल्की बात कहने की बजाय 'नरम' लफ्जों में ठोस बात कहें।
वाणी
एक बेहतरीन इंसान अपनी जुबान से ही पहचाना जाता है, वरना अच्छी बातें तो दीवारों पर भी लिखी होती हैं।
वाणी
दावानल से जला वन हरा भरा हो जाता है पर जिह्वारूपी अग्नि से जला हृदय चिरकाल में भी प्रसन्न चित्त नहीं हो पाता है।
वाणी
कष्ट काँटों के चुभने से कम बातों के चुभने से ज्यादा होता है।
वाणी
बात इतनी मधुर रखो कि कभी वापस लेनी पड़े तो खुद को कड़वी न लगे।
वाणी
साधु के वचन मृदु, मधुर, गंभीर, हितकर और संशय को हरने वाले होते हैं।
वाणी
वाणी वाण न बने वीणा जैसी गुंजायमान हो।
वाणी
अधिक बोलने वालों की अपेक्षा कम बोलने वालों के शब्दों में अधिक वजन होता है।
वाणी
जरूरी नहीं कि कुछ तोड़ने के लिए पत्थर ही मारा जाये, लहजा बदलकर बोलने से भी बहुत कुछ टूट जाता है।
वाणी
जिन्दगी की आधी शिकायतें ऐसे ही ठीक हो जायें, अगर लोग एक दूसरे के बारे में बोलने की जगह, एक दूसरे से बोलना सीख जाएँ।
वाणी
प्यार के दो मीठे बोल से खरीद लो मुझे, दौलत दिखाई तो सारे जहाँ की कम पड़ जायेगी।
वाणी
शब्दों के दाँत नहीं होते लेकिन जब काटते हैं तो दर्द बहुत होता है और कभी-कभी घाव इतने गहरे होते हैं कि जीवन समाप्त हो जाता पर घाव नहीं भर पाते हैं।
वाणी
अपने शब्दों में ताकत डालें आवाज में नहीं क्योंकि फूल बारिश से खिलते हैं, तूफान से नहीं।
वाणी
लाठी-पत्थर से हड्डियाँ टूटती हैं पर शब्दों से प्राय: सम्बन्ध टूटते हैं।
वाणी
जो ज्यादा बोलते हैं, समझना कि उनका संसार बहुत दीर्घ है।
वाणी
बोली गोली से छोटी होती है पर बोली गोली से खोटी होती है।
वाणी
जब मधुर वाणी से सर्प भी वश में हो जाता तो इंसान क्या बड़ी बात है?
वाणी
मिश्री की मिठास कण्ठ पर जाकर समाप्त हो जाती है पर वाणी तन-मन को प्रसन्न कर हृदय को आनंद से भर देती है, अत: ज्यादा मीठी है।
वाणी
कर्कश वाणी पशुत्व का प्रतीक है, मधुर वाणी देवत्व का प्रतीक है।
वाणी
समयानुसार बोलने वाला ही बुद्धिमान होता है।
वाणी
मीठा बोलने में खर्च कुछ नहीं होता मुफ्त में दूसरों का स्नेह और सम्मान प्राप्त होता है।
वाणी
वाणी का सर्वोत्तम गुण संक्षिप्तता है।
वाणी
प्रेम युक्त मीठी वाणी चुम्बक के समान अपनी ओर खींचती है।
वाणी
वाणी वह है, जो सुनने वाले को वशीभूत कर ले और नहीं सुनने वाले को भी सुनने के लिए विवश कर दे।
वाणी
प्रश्न उल्टा-सीधा कैसा भी हो उत्तर सरस, सरल, विनम्रता पूर्वक ही देना चाहिए।
वाणी
व्यर्थ बोलने की अपेक्षा मौन रहना वाणी की प्रथम विशेषता है, सत्य बोलना वाणी की दूसरी विशेषता है, प्रिय बोलना वाणी की तीसरी विशेषता है, धर्म बोलना चौथी विशेषता है, इनमें उत्तरोत्तर श्रेष्ठता है।
वाणी
भाव बिगड़ने से स्वयं का नुकसान तथा भाषा बिगड़ने से परिवार का नुकसान होता है
वाणी
मूर्खों की बात का उत्तर मौन है–''एक चुप सौ को हरावे''।
वाणी
दो चीजें निंदनीय हैं–बोलने के समय चुप रहना और चुप रहने के समय बोलना। जो लोग विद्वानों की सभा में अपने सिद्धान्त श्रोताओं के हृदय में नहीं रख सकते है, उनका अध्ययन चाहे कितना ही विस्तृत हो, फिर भी वह निरुपयोगी है।
वाणी
भली प्रकार प्रयुक्त की गई गौ (वाणी) विद्वानों ने कामनापूर्ण करने वाली कामधेनु कहा है किन्तु वही वाणी दुष्प्रयुक्त होने पर वक्ता में गोत्व (मूर्खता) को सूचित करती है।
वाणी
दूसरों से मधुर वचन बोलना जप है एक मात्र तप है।
वाणी
दुर्जनों की गालियों की परवाह करने की कोई आवश्यकता नहीं उनके कुवचनों से कुछ नहीं बिगड़ता किन्तु सज्जनों के मुख से निकलने वाले कुवाक्य अभिशाप बन कर लोगों को कष्ट पहुँचाते हैं, अत: उनके हृदय को दु:खाना ठीक नहीं है।
वाणी
जितना दिखाते हो उससे अधिक तुम्हारे पास होना चाहिए, जितना जानते हो उससे कम तुम्हें बोलना चाहिए।
वाणी
हे जीभ! भोजन और भाषण दोनों में ही संयत होओ क्योंकि अति भोजन और अतिभाषण दोनों ही प्राणों को शीघ्र ही नाश करते हैं।
वाणी
स्पष्टवादिता सर्वोच्च बुद्धिमत्ता है। अल्पभाषी व्यक्ति सर्वोत्तम होते हैं।
वाणी
व्यक्ति के स्वभाव को स्पष्ट करने वाली उसकी वाणी होती है उसका रूप नहीं।
वाणी
बादल समुद्र का खारा जल पीता है और उसको मीठा बना कर बरसा देता है इसी प्रकार सज्जन भी दुर्वचन सुन कर और सहकर उत्तर में सुवचन ही बोलते हैं।
वाणी
यदि आप एक ही कार्य से सारे जगत् को वश में करना चाहते हो तो अपनी वाणी रूपी गाय को पर की निंदा रूपी धान मत चरने दो।
वाणी
प्रवाद चाहे सत्य हो या असत्य, फिर भी लोकापवाद उच्च पदस्थ व्यक्तियों की महिमा का नाश करता ही है।
वाणी
''मधुरतम शब्द प्रशंसा है।'' जीवन का सत्य प्रसन्नता है।
वाणी
ऐसी कोई बात किसी आदमी के बारे में मत कहो, जो उस मनुष्य के मुँह पर नहीं कह सकते हैं। जो अभिमानी हैं, आदर के योग्य नहीं है, उचित अनुचित के विवेक से रहित हैं, अप्रिय वक्ता हैं, दु:ख और अपमान से संकुचित हो रहे हैं ऐसे व्यक्तियों से अत्यन्त गुणी मनुष्य संभाषण नहीं करते हैं।
वाणी
वह सर्वाधिक सुखकर बातचीत है जहाँ कोई प्रतिस्पर्धा नहीं, कोई दंभ नहीं अपितु भावों का शांत और आडंबर हीन आदान-प्रदान होता है।
वाणी