Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
Speech

वाणी

450 सूत्र · पृष्ठ 3 / 6

अपने मित्रों को एकान्त में बुरा-भला कहो, परन्तु उनकी प्रशंसा सबके सम्मुख करो।
वाणी
आप आम आदमी को आसानी से प्रेरित कर सकते हैं, यदि आप उसे यह बतायें कि आप उसकी किसी खास योग्यता के लिए उसका सम्मान करते हैं।
वाणी
लोग आपका कहा काम तभी करेंगे जब आप उसकी तारीफ (प्रशंसा) से बात शुरू करें।
वाणी
प्रत्येक व्यक्ति के दिल की गहराई में यह लालसा छुपी होती है कि उसे सराहा जाये, उसकी तारीफ की जाये।
वाणी
आलोचक भी अपनी प्रशंसा से ज्यादा खुश होते हैं।
वाणी
प्रशंसा की ठण्डी आग वज्र को भी पिघला देती है।
वाणी
प्रशंसा का ठण्डा जल महाक्रोध की आग को भी बुझा देता है।
वाणी
प्रोत्साहित करना मृत में भी जीवन का संचार करना है, हतोत्साहित करना मरे को भी मारना है।
वाणी
जो वचन द्वारा मुनियों का अनादर करते हैं, वे दूसरे भव में गूंगे होते हैं जो मन से अनादर करते हैं उनकी स्मरण शक्ति नष्ट हो जाती है, जो शरीर से तिरस्कार करते, उन्हें ऐसे कौन से दुःख हैं, जो प्राप्त नहीं होते हैं?
वाणी
मौन से बढ़कर कोई तप नहीं है।
वाणी
मौन रहने से साधु के व्रतों की रक्षा होती है।
वाणी
रिश्ता दिल में हो शब्दों में नहीं, नाराजी शब्दों में हो दिल में नहीं।
वाणी
ज्ञानामृत तथा दश धर्म का उपदेश देने की लालसा रखने वाली जिह्वा सार्थक है।
वाणी
सुखद मधुर वचन व्यक्त करने वालों के पास दुःखद दारिद्रय कभी नहीं भटकता है।
वाणी
दादागिरी दिखाने की बजाय मिठास से काम लीजिए क्योंकि डंडा मारकर मधुमक्खियों के छत्ते से शहद नहीं लिया जा सकता है।
वाणी
कम बोलो काम का बोलो।
वाणी
टालमटोल करने की बजाय सही जवाब दीजिए।
वाणी
दयार्द्र होकर दान करने से भी कहीं श्रेष्ठ है, प्रसन्न मुख के साथ मधुर वचन व्यक्त करना।
वाणी
औदार्यमय दान से भी बढ़कर सौन्दर्य वाणी की मधुरता, दृष्टि की स्निग्धता और स्नेहार्द्रता में है।
वाणी
वाणी में भी अजीब शक्ति होती है कड़वा बोलने वाले की शहद भी नहीं बिकती मीठा बोलने वाले की मिर्ची भी बिक जाती है।
वाणी
वाणी में सुई भले ही रखो पर धागा डाल कर रखो, ताकि सुई केवल छेद ही न करें, आपस में माला की तरह जोड़कर भी रखे।
वाणी
विवेक हीन से बात करना अपने शब्दों को व्यर्थ फेंकना है।
वाणी
अक्सर लोग बोलने की फिक्र में सोचना भूल जाते हैं और दौड़ने की फिक्र में मंजिल भूल जाते हैं; ठीक इसी प्रकार कमाने की चिन्ता में यह भूल जाते हैं कि किसलिए और क्यों कमा रहे हैं?
वाणी
बुद्धि का फल तत्त्व विचार है, शरीर का सार व्रत धारण करना है, धन का सार पात्र दान है और वाणी का सार मनुष्यों में प्रीति उत्पन्न करना है।
वाणी
मधुर आवाज व मनमोहक मुस्कुराहट वाले व्यक्ति सबका दिल जीत लेते हैं।
वाणी
जब भी बोलें, धीमें और धैर्य से बोलें तो आपकी वाणी दूसरों के दिल में प्रेम और जिज्ञासा का झरना बहाएगी।
वाणी
यदि आप एक ही धर्म से सारे जगत् को अपने वश में करना चाहते हैं तो दूसरों की निंदा रूपी धान्य भरे खेतों में विचर रही अपनी वाणी रूपी गौ को रोक लीजिए।
वाणी
वचन पालन करने वाला कंजूस की तरह तौल-तौलकर अपने मुख से शब्द निकालता है।
वाणी
जो व्यक्ति वाणी से ईमानदार नहीं, वह सब कामों में बेईमान हो सकता है।
वाणी
वाणी वीणा का काम करे तब तक ठीक, लेकिन वाणी जैसे ही बाण का काम करने लगे कि विनाश समझना चाहिए।
वाणी
वचन जब तक नहीं निकला तब तक वह तुम्हारे वश में है निकलने पर तुम उसके वश में हो जाओगे अतः सोच कर बोलो।
वाणी
वक्तृत्व कला–स्कूल स्तर पर हर विद्यार्थी को एक कुशल वक्ता बनाना, उसका अच्छा अभ्यास करवाना ताकि वह जीवन के हर स्तर पर सफल हो सके।
वाणी
शब्द-शब्द सब कोई कहे शब्द के हाथ न पाँव। एक शब्द औषधि करे एक करे सौ घाव ॥
वाणी
मौत के बाद दूसरा सबसे बड़ा भय होता है जनता के बीच बोलने का।
वाणी
आपकी वाणी में इतनी दम होना चाहिए कि जिसे सुनकर लोगों को जिनवाणी पर श्रद्धा हो जाये।
वाणी
अपनी वाणी पर नियंत्रण रखो कहीं यह आपका सौभाग्य ही नष्ट न कर दे।
वाणी
जिसका भाषण सुनकर श्रोता अमृत पान जैसा आनंद मानते हैं वह श्रेष्ठ वक्ता है।
वाणी
जिसके पास मीठी जुबान होती है उसे हीरे मोती पहनने की जरूरत नहीं होती है।
वाणी
अगर आपकी आँखें अच्छी हैं तो आप दुनिया को अच्छी देखेंगे अगर आपकी जुबाँ अच्छी तो आप दुनिया को अच्छे लगोगे।
वाणी
हर इंसान जुबान के पीछे छुपा है, अगर उसे समझना चाहते हो तो उसे बोलने दो।
वाणी
जो मन चाहा बोलता, उसे अनचाहा सुनना पड़ता है।
वाणी
आदमी जन्म के दो वर्ष बाद बोलना सीख जाता है पर 'क्या बोलना' यह सीखने के लिए पूरी जिन्दगी बीत जाती है।
वाणी
शालीनता से बात करने पर इज्जत मुफ्त में मिलती है।
वाणी
यदि आपके एक शब्द से भी किसी को कष्ट पहुँचता है तो आप अपनी सर्व भलाई नष्ट हुई समझो।
वाणी
लोकप्रियता के लिए वाणी माधुर्य, अनुपम जादू है, वाणी व्यक्ति को रुला भी देती है हँसा भी देती, रागी को वैरागी व वैरागी को रागी, वाणी कर्म बंध भी करा देती, कर्म बंध से मुक्ति भी करा देती है। 'साधक की वाणी मृदु, मधुर व गंभीर हो।'
वाणी
बीन सुनकर साँप खड़ा हो जाता ऐसे ही आप वाणी का प्रयोग करें कि 'सोता' व्यक्ति भी खुशी से जाग जाये।
वाणी
पानी मर्यादा तोड़े तो विनाश और वाणी मर्यादा तोड़े तो सर्वनाश होता है।
वाणी
प्रियवाणी बोलने वाले का कोई शत्रु नहीं होता है और कटु बोलने वाले का कोई मित्र नहीं होता है।
वाणी
कर क्रोध को पित्त के समान छोड़कर, लोभ को आँव के समान छोड़कर, भय को वात के समान भेद नष्ट कर, हास्य को कफ के समान नष्ट कर स्वस्थ हो मनुष्य को वाणी बोलना चाहिए।
वाणी
प्रभावी ढंग से बोलना सीखें।
वाणी
बहुत अधिक बोलने वाले पर बोला गया शब्द इतिहास बन जाता है।
वाणी
विचार चाहे पुराना हो और बहुत बार पेश किया जा चुका हो, लेकिन आखिरकार वह उसका है जो उसे बेहतरीन तरीके से पेश करे।
वाणी
वक्ता वह नहीं जो कि सुंदर बोलने वाला हो अपितु वह है जिसका अंतरंग आत्म विश्वास से ओत-प्रोत हो।
वाणी
गाली देकर सिर्फ अपमान ही किया जा सकता है मान की प्रतिष्ठा नहीं की जा सकती है।
वाणी
कठोर बात ही दुनिया में सबसे ज्यादा कमजोर होती है।
वाणी
गाली वापसी का टिकट लेकर ही आती है।
वाणी
जिस तरह भूसे को कूटना निरर्थक है उसी तरह विचार हीन व्यक्ति से युक्ति युक्त बात करना निरर्थक है।
वाणी
अशान्ति न करने वाला, प्रिय, हितकारी, यथार्थ सत्यभाषण और स्वाध्याय का अभ्यास– ये सब वाणी के तप कहे जाते हैं।
वाणी
जो मनुष्य अपने दु:खों को गाता है वह उन्हें चौगुना करता है।
वाणी
सत्य के अनन्य भक्त के लिए मौन आध्यात्मिक नियंत्रण का एक अंग है।
वाणी
मधुर (मीठा) खाकर कटु बोलना न्याय संगत नहीं है।
वाणी
अनुभव के बिना बोलना विनाश का कारण होता है।
वाणी
भाषा हमें इसलिए दी गयी थी कि हम एक-दूसरे से रूचिकर बातें कर सकें।
वाणी
प्रत्येक मनुष्य कहना पसंद करता है, सुनना नहीं।
वाणी
दिमाग को आराम देने के लिए मौन रहिये।
वाणी
अपनी जुबान को हार बनाइये, हथियार नहीं।
वाणी
हँसी-मजाक में भी कहे कड़वे वचन आदमी के दिल में चुभ जाते हैं।
वाणी
वाणी ही एक ऐसा आभूषण है जो अन्य आभूषणों की तरह कभी घिसता नहीं है।
वाणी
हृदय को सरल व वाणी को निर्दोष रखना चाहिए।
वाणी
मैं कथनी की अपेक्षा करनी में अधिक विश्वास रखता हूँ।
वाणी
यदि आपको बूढ़ों का ज्यादा बोलना अच्छा नहीं लगता तो उनसे यह शिक्षा लो कि कल जब आप बूढ़े होगे तो जरूरत से ज्यादा न बोलोगे।
वाणी
सामने वाले व्यक्ति को ज्यादा बातें करने दें।
वाणी
भाषण मस्तिष्क का दर्पण है।
वाणी
कुशल वाणी बड़े-बड़े विरोधी वक्ताओं को भी बिल्कुल मूक बना देती है।
वाणी
दूसरों को उपदेश देना सरल है।
वाणी