Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
समाधि

उपसर्गे दुर्भिक्षे, जरसि रुजायां च निःप्रतिकारे। धर्माय तनु विमोचनमाहुः सल्लेखनामार्याः।।

जिसका प्रतिकार न किया जा सके ऐसे उपसर्ग के आने पर, दुर्भिक्ष के पड़ने पर, वृद्धावस्था आने पर, धर्म के लिए शरीर का विसर्जन करना सल्लेखना कहलाती है।

The noble ones call it Sallekhana: to give up the body for the sake of Dharma when an unavoidable calamity strikes, when famine falls, when old age or an incurable disease comes.

— आराध्य सूत्र · #1

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बालक जन्मता है तो वह बड़ा होगा कि नहीं, पढ़ेगा कि नहीं, उसका विवाह होगा कि नहीं, उसके बाल-बच्चे होंगे कि नहीं, उसके पास धन होगा कि नहीं आदि सब बातों में सन्देह है, पर वह मरेगा कि नहीं, इसमें कोई संदेह नहीं है।
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