Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
कर्म

प्राप्नुवन्त्यति घोरेषु, रोरवादिषु सम्भवं। तिर्यक्ष्वथ निगोदेषु, मृषा वाक्येन देहिनः।।

झूठ बोलने से प्राणी नरकों के पशुगति के और निगोद अवस्था के अत्यन्त दुःख पाते हैं।

By speaking falsehood beings attain the most terrible sufferings of the hells, the animal state, and the nigoda condition.

— आराध्य सूत्र · #16

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