नृ जन्मन्यपि यः, सत्य प्रतिज्ञा च्युतोऽधमः। स केन कर्मणा पश्चात्, जन्म पङ्क्तरिष्यति।।
जो अज्ञानी मनुष्यगति में सत्य को छोड़ दे, वह बाद में कौन से कर्म से संसार सागर को पार करेगा?
The ignorant one who abandons truth even in the human birth—by what deed will he later cross the ocean of worldly existence?
— आराध्य सूत्र · #18
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