Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

पार्श्वनाथ जी- कमठ का जीव पूर्व अवस्था में पार्श्वनाथ का भाई था, लेकिन क्षमा के अभाव में दस भव तक घोर उपसर्ग करता रहा, किन्तु पार्श्वनाथ जी ने क्षमा को नहीं छोड़ा और केवलज्ञान को प्राप्त किया था।

Parshvanath Ji: the soul of Kamath had been Parshvanath's brother in a former life, but lacking forgiveness he inflicted terrible afflictions across ten births; yet Parshvanath never abandoned forgiveness and attained omniscience.

— आराध्य सूत्र · #115

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा