Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

विद्युच्चर मुनि की क्षमा- उग्र तप के धारी विद्युच्चर नामक मुनिराज को चामुण्डा नामक व्यन्तरी ने घोर उपसर्ग किया, उस उपसर्ग को समता से सहनकर मोक्ष को प्राप्त हुए हैं।

The forgiveness of Muni Vidyuchchar: the deity Chamunda inflicted a terrible affliction on the austere Muni Vidyuchchar, yet bearing that affliction with equanimity he attained liberation.

— आराध्य सूत्र · #8

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा