Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

जो गुरु, शिष्य को एक अक्षर भी पढ़ाता है, उसे पृथ्वी पर ऐसा कोई पदार्थ नहीं जिसे देकर ऋण रहित हो सकें।

For a guru who teaches a disciple even one letter, there is no object on earth by giving which one can become free of that debt.

— आराध्य सूत्र · #2178

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति