Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
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परिवार

320 सूत्र · पृष्ठ 5 / 5

1.जन्मदाता, 2.यज्ञोपवीत (दीक्षा प्रदाता) संस्कार करने वाला, 3.विद्या देने वाला, 4.अन्न देने वाला और 5.भय से रक्षा करने वाला ये पाँच पिता माने गये हैं।
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1.राजपत्नी, 2.गुरु पत्नी, 3.मित्र पत्नी, 4.पत्नी की माता एवं 5.स्वयं की माता ये पाँच मातायें मानी गयीं हैं।
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पूत सपूत तो का धन सञ्चय, क्षण में लाख कमा लेगा। पूत कपूत तो का धन सञ्चय, क्षण में लाख गँवा देगा।।
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पक्षी नाना देशों और दिशाओं से आकर वृक्षों पर रैन बसेरा करते हैं और प्रातः काल अपने-अपने कार्य के वश नाना देशों और दिशाओं में चले जाते हैं, वैसे ही परिवार के लोग अनेक गतियों से आकर के एक घर में रहते हैं और अपने-अपने कर्मों के अनुसार नाना गतियों में चले जाते हैं।
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अपनी सन्तान के लिये यही उपदेश छोड़कर जाओ, यदि बच्चे एश आराम वाले होंगे, तो पाप करेंगे और व्यापार को चौपट करेंगे ऐसे नालायकों को धन कभी न देना, हम भाइयों ने व्यापार को बढ़ाया तो यह समझकर कि वे लोग धन का सदुपयोग करेंगे।
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शादी के पहले साल वाह-वाह, दूसरे साल आह-आह, तीसरे साल तबाह इसे कहते है विवाह।
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पहली साल पति बोलता है और पत्नि सुनती है, दूसरे साल पत्नि बोलती है और पति सुनता है, तीसरी साल दोनों बोलते हैं और पड़ोसी सुनता है, ये हैं विवाह के हाल।
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आज कल नव दम्पति के विवाह के कुछ समय पश्चात् ही विवाद पैदा होने की नौबत आने लगी है। इस विवाद की परिणति कभी-कभी पति या पत्नि द्वारा आत्महत्या करने में होती है, इसे बचाया जा सकता है यदि लड़के और लड़की शादी के पूर्व जरूरी बातों पर चर्चा कर लें।
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लड़की की उम्र- लड़की की उम्र प्रायः कम बताई जाती है, उम्र सही बताइये, आपके गुणों को देखते हुए उम्र का थोड़ा बहुत अन्तर लड़का स्वीकार कर लेगा।
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शैक्षणिक योग्यता- अभिभावक प्रायः कहते हुए पाये जाते हैं साहब हमारा पुत्र या पुत्री ग्रेजुएट है, बी.ए. और बी.ई., दोनों ग्रेजुएट हैं पर दोनों में काफी अन्तर है, अतः शिक्षा की सही-सही जानकारी देना आवश्यक है।
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रुचियाँ व अन्य योग्यताएँ- सिलाई, कढ़ाई, जैसी रूचियां प्रायः बनावटी या थोपी हुई होती हैं, इस विषय में खुलकर बात करें, किसी विशिष्ट पाठ्य क्रम योग्यता में आपने अच्छा स्थान बनाया हो तो स्पष्ट बता दें कि आप विवाहोपरान्त सम्बन्धित गतिविधियों से जुड़े रहेंगे या नहीं?
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आय- प्रायः अभिभावक होने वाले दामाद की आय ऐसे बताते हैं, कि साहब बिटिया 'रानी' बनकर रहेगी, मुख्य व्यवसाय के अलावा दूनी ऊपरी कमाई हो जाती है, अतः वास्तविक आय के आधार पर ही विवाह का निर्णय कीजिए।
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शारीरिक स्वास्थ्य- शारीरिक स्वास्थ्य चश्मादि लगता हो तो छिपायें न। अपने व्यक्तित्व के चुनन्दा सकारात्मक व नकारात्मक पहलुओं से लड़के को अवगत करा दें व उससे भी पूँछ लें।
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अपने खानपान, मांसाहार-शाकाहार की जानकारी कर लें, विवाहोपरान्त यह भोजन बनाना खाना पसन्द करेंगे या नहीं ? अभिभावक आज कल लड़की के दिमाग में भर देते हैं कि एकाकी परिवार ही सर्वोत्तम है, तुम्हारा सम्बन्ध संयुक्त परिवार में जुड़े तो जाकर तोड़ देना, यही तुम्हारे हित में होगा, इसे भी पूँछ लें।
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नाभिराय और मरूदेवी का विवाह इन्द्र ने किया था। तेरहवें कुलकर से पुत्र-पुत्री का अलग अलग जन्म हुआ था।
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कुलकर वंश और भवन- प्रथम कुलकर प्रतिश्रुति महाप्रभाव से सम्पन्न एवं अपने पूर्व भव के स्मरण से सहित थे। प्रतिश्रुति कुलकर के स्वर्गस्थ होने पर उन्हीं का पुत्र सन्मति द्वितीय कुलकर हुआ इसी प्रकार सभी कुलकर एक ही वंश के थे। उस समय भरत क्षेत्र में कल्पवृक्ष रूप प्रासाद अन्यत्र नष्ट हो गये थे परन्तु राजा नाभिराय का जो कल्पवृक्ष रूप प्रासाद था वही पृथ्वी निर्मित बन गया था, राजा नाभिराय के उस प्रासाद का नाम सर्वतोभद्र था, उसके खम्भे स्वर्ण मय थे, दीवालें नाना प्रकार के मणियों से निर्मित थीं वह पुखराज तथा मोती आदि की मालाओं से सुशोभित था, इक्यासीखण्ड से युक्त था और कोट, वापिका तथा बाग-बगीचों से अलङ्कृत था। वह अधिष्ठाता नाभिराय के प्रभाव से अकेला ही अनेक कल्पवृक्षों से आवृत था तथा पृथ्वी के मध्य अपने स्थान पर अधिष्ठित था।
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माँ, महात्मा, एवं परमात्मा इन तीन का आशीर्वाद जरूरी है, बचपन में माँ सम्भालती, जवानी में महात्मा, बुढ़ापे में परमात्मा।
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दिल के फोले जल उठे, सीने के एक दाग से। घर में ही आग लग गयी, घर के ही चिराग से।।
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पिता का मरण न बिगड़ जाय- अतः प्रेम का अभिनय किया जाय- पति-पत्नी में बहुत दिन से विवाद चल रहा था, इस कारण वे अलग-अलग रहते थे, कुछ दिनों में तलाक होने ही वाला था। एक दिन पत्नी के पिताजी का पत्र आया कि 'बेटा अब हम काशी जाकर सन्यास मरण करना चाहते हैं, इसके पहले हमारी इच्छा है कि कुछ दिन तुम्हारे पास रह लें और देख लें कि तुम सुख से रहती हो, तो हमारा सन्यास मरण अच्छे से हो जायेगा', पत्नी पति के पास आई और बोली 'पिताजी आ रहे हैं इसके बाद उन्हें काशी सन्यास मरण के लिए जाना है, कहीं उनका मरण न बिगड़ जाए इसलिए हम लोग कुछ दिन साथ-साथ रहते हैं', पिताजी आये पति-पत्नी प्रेम पूर्वक रहे, जब जाने लगे तो दोनों पिताजी को छोड़ने रेल्वे स्टेशन गये, जब लौटे तो पुनः अलग-अलग जाने लगे, तो पति ने कहा कि 'पिता का मरण न बिगड़ जाए इसके लिए हम लोग साथ-साथ रह सकते हैं, पर हम लोगों का मरण न बिगड़ जाए इसके लिए हम साथ-साथ नहीं रह सकते?' पत्नी ने कहा जब बनती नहीं तो साथ-साथ कैसे रहें, पति ने कहा कि हम प्रेम से रहने का अभिनय करेंगे तो धीरे-धीरे प्रेम हो ही जायेगा, फिर वे मरण बिगड़ने के डर से साथ-साथ रहने लगे।
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माँ बच्चे को दूध पिलाती है, स्तन मुख में कान हृदय में होता है, बालक हृदय से संस्कार लेता है।
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