राजपत्नी गुरोः पत्नी, मित्रपत्नी तथैव च। पत्नीमाता स्वमाता च, पञ्चैता मातरः स्मृताः।।
1.राजपत्नी, 2.गुरु पत्नी, 3.मित्र पत्नी, 4.पत्नी की माता एवं 5.स्वयं की माता ये पाँच मातायें मानी गयीं हैं।
Five are regarded as mothers: the king's wife, the teacher's wife, a friend's wife, one's wife's mother, and one's own mother.
— आराध्य सूत्र
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