Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

सीता जी को लङ्का से लाने के लिए पुल बाँधने की आवश्यकता पड़ी, हनुमान जी पत्थर पर राम का नाम लिखकर पानी में डालते थे, तो पत्थर पानी में नहीं डूबता था, रामचन्द्रजी ने पानी में पत्थर डाला तो डूब गया, तब रामचन्द्र जी ने हनुमान जी से पूँछा आप पानी में पत्थर डालते हैं तो डूबता नहीं इसमें क्या रहस्य है? तो हनुमान जी बोले भगवान्! जो आपके हाँथ से छूट जाएगा वह डूबने से कैसे बच सकता है, इसी प्रकार जिसके हृदय में सच्चे देव-शास्त्र-गुरु के प्रति श्रद्धा नहीं है वह संसार समुद्र में डूबने से कैसे बच सकता है?

To bring Sita from Lanka a bridge had to be built. Hanuman would write Rama's name on the stones and cast them into the water, and they would not sink; when Ramachandra himself cast a stone it sank. Ramachandra asked Hanuman the secret of why his stones did not sink. Hanuman replied, 'Lord! Whatever slips from Your hand — how can it be saved from sinking?' In the same way, one in whose heart there is no faith in the true Deva, Shastra and Guru — how can he be saved from drowning in the ocean of worldly existence?

— आराध्य सूत्र · #46

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
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