Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 2 · अध्याय 17

सफल सीख- स्वस्थ बनो पर।

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कर्म तेरे अच्छे हैं तो किस्मत तेरी दासी है, नियत तेरी साफ है तो घर में ही मथुरा काशी है।
कर्म
सफल व्यक्ति जन्म से नहीं कर्म से महान माना जाता है, साधु वस्त्र त्याग से नहीं क्रिया से होता है, धर्मस्थल प्रदर्शन से नहीं प्रार्थना से होता है, सम्प्रदाय संख्या से नहीं सामूहिक क्रियाओं के करने से सफल माना जाता है।
चरित्र
जिनका मुख प्रसन्नता का घर है, हृदय दया सहित है, वचन अमृत झराने वाले हैं और कार्य परोपकार करना है, वे सज्जन सभी के द्वारा वन्दनीय होते हैं।
चरित्र
अच्छा नेता वह नहीं जो चुनाव जीतता है, बल्कि अच्छा नेता वह होता है, जो लोगों के दिलों को जीतता है।
चरित्र
दिल जीतना है तो बड़ों का आशीर्वाद लेना और छोटों को प्यार देना सीख लें।
विनम्रता
बीती बात को भूलने में ही भलाई है, वरना वर्तमान में जीना दूभर हो जायेगा और भविष्य असम्भव लगने लगेगा।
समय
धार्मिक कार्यों में कञ्जूसी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि कञ्जूसी के दोष से मनुष्य नियम से दरिद्र होता है।
दान
जिसके पास सत्य, तप, इन्द्रिय विजय नहीं है, प्राणी मात्र के प्रति दया नहीं है वह चाण्डाल कहलाता है।
चरित्र
सत्य से धर्म उत्पन्न होता है, दान से दया बढ़ती है, क्षमा से धर्म स्थापित किया जाता है एवं क्रोध और लोभ से धर्म का नाश होता है।
धर्म
इस जगत् में सत्पुरुष वे हैं जो उत्तम तप, चारित्र तथा यम आदि को स्वीकृत कर प्राणान्त होने पर भी नहीं छोड़ते हैं।
चरित्र
सादगी से बढ़कर कोई श्रृङ्गार नहीं है और विनम्रता से बढ़कर कोई व्यवहार नहीं है।
विनम्रता