हत्वा स्वपुण्यसन्तानं, मद्घोषं यो निकृन्तति। तस्मै यदिह रुष्यामि, मदन्यः कोऽधमस्तदा ॥20॥
अपने पुण्य को नष्ट करके अगर कोई मेरे दोषों को नष्ट करता है उस पर भी मैं अगर क्रोध करूँ तो मेरे से अधम और कौन होगा ?
If someone, destroying his own merit, destroys my faults, and I still grow angry at him, then who is lower than I?
— आराध्य सूत्र · #108
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