Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

दुकानदार की क्षमा- शैतान लड़के ने दुकानदार से साड़ी की कीमत पूँछी, सौ रुपए बताया, साड़ी को बीच में से फाड़ दिया और पूछा आधी साड़ी कितने की ? दुकानदार ने कहा पचास रुपये की, इस प्रकार साड़ी के टुकड़े-टुकड़े कर कहा यह साड़ी हमारे काम की नहीं है और साड़ी की कीमत दिये विना जाने लगा तो दुकानदार ने कहा साड़ी तो पुनः बन सकती है, किन्तु जीवन बिगड़ गया तो फिर नहीं बनेगा तो उसने चरणों में गिरकर क्षमा मांगी।

The shopkeeper's forgiveness: a mischievous boy asked a shopkeeper the price of a sari; told it was a hundred rupees, he tore it in half and asked, 'How much for half a sari?' 'Fifty,' said the shopkeeper. Tearing it to shreds this way, the boy said 'This sari is of no use to us' and made to leave without paying. The shopkeeper said, 'A sari can be made again, but a life once ruined cannot be remade' — at which the boy fell at his feet and begged forgiveness.

— आराध्य सूत्र · #110

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा