Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
कर्म

स्वयंकृतं कर्म यदात्माना पुरा, फलं तदीयं लभते शुभाशुभं। परेण दत्तं यदि लभ्यते स्फुटम्, स्वयं कृतं कर्म निरर्थकं तदा ॥18॥

पूर्व जन्म में स्वयं के द्वारा किए हुये शुभ-अशुभ कर्मों का फल ही जीव भोगता है, अगर दूसरे के द्वारा दिए हुये कर्मों का फल जीव भोगे तो उसके किए हुये कर्मों का फल व्यर्थ हो जाएगा।

A being reaps only the fruit of the good and bad deeds it did itself in past lives; if it reaped the fruit of deeds done by others, then the fruit of its own deeds would be rendered meaningless.

— आराध्य सूत्र · #106

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