Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

अजनबी व्यक्ति ने आचार्य विद्यासागरजी से अटपटा प्रश्न किया-What is your busines. आचार्य श्री ने शान्ति से उत्तर दिया- Busy nes is my busines. अर्थात् धर्म ध्यान में व्यस्त रहना ही हमारा व्यापार है।

A stranger put an awkward question to Acharya Vidyasagarji — 'What is your business?' The Acharya calmly replied, 'Busy-ness is my business' — that is, staying absorbed in dharma-dhyana is our sole occupation.

— आराध्य सूत्र · #20

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा