Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विनम्रता

एक राजा जङ्गल में सैर करने गया, अचानक आँधी तूफ़ान आने से सभी सैनिक-साथी बिछुड़ गये, छाया पाने की इच्छा से राजा एक महात्मा की झोपड़ी में गया, महात्मा लेटा हुआ था, राजा को देखकर बैठ गया, सोचा बैठने से दो लोग बन जायेंगे, इतने में पानी में भीगता हुआ एक गधा भी आ गया, महात्मा बोले राजन्! हम लोग खड़े हो जाते हैं, जिससे ये गधा भी झोपड़ी के अन्दर आ जायगा, राजा ने कहा! क्या करते हो गधे को भी झोपड़ी के अन्दर? महात्मा ने कहा राजन्! ये साधु की झोपड़ी है यहाँ गधों से भी मनुष्यों जैसा व्यवहार किया जाता है, ये रईसों की कोठी नहीं है जहाँ मनुष्यों से भी गधों जैसा व्यवहार किया जाता है।

A king went to roam the forest; a sudden storm scattered all his soldiers. Seeking shelter, he entered a sage's hut. The sage, lying down, sat up on seeing the king, thinking two can now sit. Just then a donkey, drenched in the rain, came in too. The sage said: O king, let us stand, so this donkey too may come inside the hut. The king asked, why let even a donkey into the hut? The sage replied: O king, this is a monk's hut, where even donkeys are treated like men; it is not the mansion of the rich, where even men are treated like donkeys.

— आराध्य सूत्र · #27

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जीवन जीने का आनंद संघर्ष में नहीं समर्पण से मिलता हैं जैसे विभीषण ने संघर्ष नहीं समर्पण किया, तो राम ने उसको लंका का राजा बना दिया, रावण ने संघर्ष किया तो मिट्टी में मिला दिया।
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