Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

आपगासागरस्नान, मुच्चयः सिकताश्मनां। गिरिपातोऽग्निपातश्च, लोकमूढ़ं निगद्यते।।

नदी और सागर में स्नान करना, बालू और पत्थर के ढेर लगाना, पर्वत से गिरना और अग्नि में जलकर (सतिप्रथा को) धर्म मानना लोक मूढ़ता है।

Bathing in rivers and seas, heaping up sand and stones, throwing oneself from a mountain, and burning in fire (the sati custom) — regarding these as dharma is worldly folly.

— आराध्य सूत्र · #4

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
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