Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

सग्रन्थारम्भहिंसानां, संसारावर्त वर्तिनां। पाखण्डिनां पुरस्कारो, ज्ञेयं पाखण्डिमोहनं।।

संसार में भ्रमण करने वाले, आरम्भ परिग्रही, हिंसक, कुगुरुओं का सम्मान करना गुरु मूढ़ता कहलाती है।

Honoring false gurus — who wander in worldly existence, engage in undertakings and possessions, and are violent — is called the folly of false gurus (guru-mudhata).

— आराध्य सूत्र · #6

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक