स्वयं शुद्धस्य मार्गस्य, बालाशक्तजनाश्रयां। वाच्यतां यत्प्रमार्जन्ति, तद्वदन्त्युपगूहनम्।।
स्वयं शुद्ध मार्ग की, बालक व असमर्थ लोगों के द्वारा होने वाली निन्दा को जो दूर करते हैं, उसे उपगूहन अङ्ग कहते हैं।
Removing the reproach that immature and incapable people bring upon the inherently pure path is called the limb of concealment (upaguhana).
— आराध्य सूत्र · #1
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