Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 69

साहित्य साधने का सदन है

128 सूत्र · पृष्ठ 3 / 3

जिस सौन्दर्य में भोलेपन की झलक नहीं, वह बनावटी सौन्दर्य है।
चरित्र
दूसरों में त्रुटियाँ ढूँढ़ते रहना खतरनाक आदत है इससे मन की प्रसन्नता उसी तरह नष्ट हो जाती है जैसे किसी फूल पर चलता हुआ कीड़ा उसकी पाँखुड़ियों को कुतरता चलता है।
मन
त्रुटियाँ तो केवल उसी से नहीं होगी जो कभी कोई काम ही न करें।
पुरुषार्थ
संसार का सर्वश्रेष्ठ दान ज्ञान है क्योंकि इसे चोर चुरा नहीं सकते न कोई इसे नष्ट कर सकता है, यह निरंतर बढ़ता रहता है और लोगों को स्थाई सुख देता है।
दान
बलवान से बुद्धिमान और शक्तिमान से ज्ञानवान अधिक शक्तिशाली होता है।
ज्ञान
विनम्रता, जिज्ञासा और सेवा से ज्ञान प्राप्त होता है, ज्ञान के समान पवित्र करने वाली और कोई चीज नहीं है।
ज्ञान
तुम तपस्वी लोगों की महिमा को नहीं नाप सकते, यह काम उतना ही कठिन है, जितना कि दिवंगत आत्माओं की गणना करना है।
धर्म
गृहस्थाश्रम में रहने वाला मनुष्य ब्रह्मचर्य आश्रम, वानप्रस्थ आश्रम और संन्यास आश्रम का प्रमुख आश्रय हैं।
धर्म