Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 48

स्वयं स्वयं पर बनो कृपालु

67 सूत्र · पृष्ठ 2 / 2

शक्ति या बुद्धिमत्ता से नहीं, सतत् प्रयासों से ही हमारी क्षमताएँ सामने आती हैं।
पुरुषार्थ
प्रेम के बिना जीवन उस वृक्ष की तरह है जिसमें फल कभी नहीं लगते हैं।
भक्ति
पर्याय का विनाश सुनिश्चत है, अतः इसका सदुपयोग कर लो।
समय
मनुष्य परिस्थितियों का दास नहीं, वह उनका निर्माता, नियंत्रण कर्ता, स्वामी है।
संयम
प्रबल पुण्यात्मा जीव के ही परिणाम निर्मल होते हैं।
कर्म
कठिनाइयों से, प्रतिकूलताओं से घिरे होने पर भी जीवन का वास्तविक प्रयोजन समझने वाले व्यक्ति कभी निराश नहीं होते हैं, वे हर प्रकार की परिस्थितियों में अपने लक्ष्य के लिए प्रेरणा प्राप्त करते हैं तथा श्रेष्ठ पथ पर क्रमशः आगे बढ़ते हैं।
पुरुषार्थ
जब दिमाग कमजोर होता तब परिस्थितियाँ समस्या बन जाती हैं, जब दिमाग स्थिर होता है तब परिस्थितियाँ चुनौती बन जाती हैं, जब दिमाग मजबूत होता है तब परिस्थितियाँ अवसर बन जाती है।
मन