वाणी मधुर (मीठा) खाकर कटु बोलना न्याय संगत नहीं है। To eat sweets yet speak bitterly is not just. — आराध्य सूत्र · #6401 0 – भेजें 🖼️ इमेज सेव करें · Save image card
दूसरों की निंदा और अपनी प्रशंसा करने से नीचगोत्र का बंध होता है और वह बंध दूसरे गुणस्थान तक ही होता है अतः निंदा करने वाला नियम से ही मिथ्यादृष्टि पापी है। वाणी 0 – भेजें