Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
Namokar & Mantra

णमोकार

113 सूत्र · पृष्ठ 2 / 2

घटना जखौरा की है–एक मुसलमान भाई ने णमोकार मन्त्र के सहारे अनेक लोगों की विपत्तियाँ दूर कीं, वह सामायिक भी करता था, एक बार पलंग पर लेटा था, थोड़ी देर बाद सपना आया कि तेरे पलंग में सर्प है, उठकर दो-तीन बार ऊपर-नीचे देखा कहीं नहीं दिखा, पुनः णमोकार मन्त्र पढ़कर सो गया, प्रातः बिस्तर लपेटा बिस्तर में से सर्प निकल कर बाहर चला गया, उसका कुछ नहीं हुआ, यह मन्त्र का प्रभाव था, गाँव के मुस्लिम भाइयों को पता चला यह जैन धर्म मानता है, पञ्चायत बुलाई, भला-बुरा कहा, वह सब कुछ सुनता रहा, पर जैनधर्म छोड़ने को तैयार नहीं हुआ, जाति भाइयों ने उसे मार डालने का निर्णय लिया, जिससे दूसरा धर्म ग्रहण नहीं कर सके, सामायिक में बैठा विरोधियों ने वहाँ सर्प छोड़ दिया, वह चारों ओर घूमता रहा उसका कुछ नहीं हुआ, तीन दिन बाद सर्प छोड़ने वाले को ही सर्प ने डँस लिया, वह मर गया, दो दिन बाद उसके पिता को भी काटा, वह भी मर गया, यह था मन्त्र का प्रभाव।
णमोकार
अमेरिका में एक मुसलमान को णमोकार मन्त्र मिल गया, वह मन्त्र से ताबीज बनाता था, सौ डॉलर में बेचता था।
णमोकार
अरिहन्त का अ, अशरीरी का अ=आ, आचार्य का आ = आ, उपाध्याय का उ = ओ, मुनि का म्=ओम्।
णमोकार
ओम् का ध्यान करने से शरीर में पाँच तत्त्वों की पूर्ति होती है–अ=अवनि, अ-अम्बु, अ= अग्नि, अ= अनिल, अ=आकाश।
णमोकार
णमोकार मौन सिखाता है, नमो का उल्टा मौन होता है।
णमोकार
मध्यमा और अंगुष्ठ से जाप करें, नाखून न लगावें, मेरु न लाँघे, माला भूमि से स्पर्श न करें।
णमोकार
सिद्धक्षेत्र का द्योतक णमोकार–अरहन्त से अष्टापदजी, सिद्ध से सिद्धोदयजी, आचार्य से आहारजी, उपाध्याय से ऊर्जयन्तजी, साधु से सम्मेदशिखरजी।
णमोकार
मन्त्र छोटा होता है, ग्रन्थ की तरह बड़ा नहीं होता, हीरा छोटा होता है, चट्टान की तरह बड़ा नहीं होता पर बड़ी चट्टान को काट देता है, अंकुश छोटा होता है पर मदोन्मत्त हाथी को वश में करता है, वट का बीज भी छोटा होता है पर विशाल वृक्ष का रूप धारण करता है, इसी तरह णमोकार मन्त्र वट के बीज की तरह महान् फल देने वाला है।
णमोकार
पंच परावर्तन से बचना है तो पंच परमेष्ठी को भजो पाँचों पापों को तजो।
णमोकार
जो व्यक्ति गंभीर, शान्त चित्त, चंचलता रहित होगा वही मंत्र सिद्ध कर सकता है, वाचाल को मंत्र की सिद्धि नहीं होती है।
णमोकार
जितना अँगूठा फोन पर चलता उतना माला पर चलता तो जीवन सफल हो जाता।
णमोकार
मंत्रोच्चारपूर्वक भोजन बनायेंगे तो 'हीरो' नहीं 'संत साधक' पैदा होंगे।
णमोकार
इस असार एवं दुःख पूर्ण संसार में अनन्त अवसर्पिणी-उत्सर्पिणी काल व्यतीत हो गए, उन समस्त कालों में यही मन्त्रराज महत्त्वपूर्ण रहा है अर्थात् अतीत काल में जिन भव्य प्राणियों ने मुक्ति पाई है, विदेहादिक से वर्तमान काल में पा रहे हैं, पाँच भरत और पाँच ऐरावत क्षेत्र से भविष्यत् काल में मुक्ति पायेंगे, यह सब मन्त्रराज का ही प्रभाव जानना चाहिए।
णमोकार
यदि कोई तराजू के एक पलड़े पर णमोकारमन्त्र को स्थापित करे तथा दूसरे पलड़े पर त्रिलोक की सम्पत्ति को स्थापित करें तो प्रथम पलड़ा ही भारी होगा, ऐसे महान् गौरवशाली णमोकारमन्त्र को ‘‘मैं त्रियोग की शुद्धिपूर्वक नमस्कार करता हूँ’’।
णमोकार
इस असार एवं दुःख पूर्ण संसार में अनन्त अवसर्पिणी-उत्सर्पिणी काल व्यतीत हो गए, उन समस्त कालों में यही मन्त्रराज महत्त्वपूर्ण रहा है अर्थात् अतीत काल में जिन भव्य प्राणियों ने मुक्ति पाई है, विदेहादिक से वर्तमान काल में पा रहे हैं, पाँच भरत और पाँच ऐरावत क्षेत्र से भविष्यत् काल में मुक्ति पायेंगे, यह सब मन्त्रराज का ही प्रभाव जानना चाहिए।
णमोकार
यदि कोई तराजू के एक पलड़े पर णमोकारमन्त्र को स्थापित करे तथा दूसरे पलड़े पर त्रिलोक की सम्पत्ति को स्थापित करें तो प्रथम पलड़ा ही भारी होगा, ऐसे महान् गौरवशाली णमोकारमन्त्र को ''मैं त्रियोग की शुद्धिपूर्वक नमस्कार करता हूँ''।
णमोकार
मन के जुड़े बिना मन्त्र प्रभाव हीन हो जाते हैं।
णमोकार
मणि मंत्र और औषधि का प्रभाव अचिन्त्य होता है।
णमोकार
पंचक में मरण होने पर श्मशान में ५ श्रीफल रखें जलाये नहीं एवं ५ बार णमोकार मंत्र पढ़ें नैमित्तिक दोष दूर हो जायेगा।
णमोकार
सामान्य व्यक्ति की दृष्टि नकारात्मक ऊर्जा वाली एवं आचार्य भगवन् मंत्र में सकारात्मक ऊर्जा देते हैं इसलिए परदे के पीछे से देते हैं।
णमोकार
कार में पेट्रोल न हो तो बेकार, णमोकार के प्रति श्रद्धा न हो तो बेकार श्रद्धा होने पर भी कार धोका दे सकती है णमोकार नहीं।
णमोकार
णमोकार मन्त्र के प्रभाव से सर्प ने नागेन्द्र पद, अञ्जन चोर ने मोक्ष पद और सुभग ग्वाला ने अभीष्ट फल प्राप्त किया था।
णमोकार
हर अक्षर मंत्र है गीत भी मंत्र है और गाली भी मंत्र है, मंत्र का तात्पर्य प्रभावित कर देना है, यदि आपने किसी मुस्कुराते व्यक्ति को गाली दी तो वह भी रोने लगता है और यदि रोते व्यक्ति की प्रशंसा की तो वह प्रसन्न हो जाता है, मंत्र अनेक प्रकार के होते हैं। जैसे आकर्षण, सम्मोहन, वशीकरण, मोहन, उच्चाटन, विद्वेषीकरण, मारण आदि।
णमोकार
जिसकी कुण्डली में मंगल हो, वह हमेशा नमः सिद्धेभ्यः का जाप करें।
णमोकार
जो जीव णमोकार का पाठ प्रतिक्षण करता रहता है, उसका नियम से समाधिमरण होता है।
णमोकार
जैसे तिल का सार तैल है, दूध का सार घृत है, फूल का सार इत्र है, वैसे ही द्वादशाङ्ग का सार णमोकार है, यह अनादि अनिधन मन्त्रराज समस्त अंगों, पूर्वों तथा जिनशासन का श्रेष्ठ सार है।
णमोकार
ब्रह्म 108 का प्रतीक है- 'ब' वर्ण 23, 'र' वर्ण 27, 'ह' वर्ण 33, 'म' वर्ण 25 = 108।
णमोकार
कल्याण सागर जी महाराज गृहस्थ अवस्था में यात्रा के दौरान बीमार हो जाने पर एक व्यक्ति ने सहयोग किया था बदले में पैसे न लेकर कहा आप भी परोपकार करना उसका प्रभाव यह हुआ कि उन्होंने मुनि दीक्षा लेकर भी 'णमोकार द्वारा पर का कल्याण किया था।
णमोकार
समस्त शक्तियों में मन्त्र शक्ति और समस्त बलों में पूर्वोपार्जित पुण्य प्रबल होता है।
णमोकार
वाचनिक उपकार के कारण णमोकार मन्त्र में सिद्धों से पहले अरिहन्त पद को रखा है।
णमोकार
मन्त्र के शब्दों से सर्प, बिच्छु आदि के जहर तक उतर जाते हैं।
णमोकार
गिरते ही उसे णमोकार मन्त्र याद आया।
णमोकार
इसी महा मन्त्र का ध्यान करने से जो शुभकर्म का बन्ध होता है उससे दुष्टों द्वारा किये घोर उपद्रवों का भी नाश हो जाता है।
णमोकार
णमो अरहन्ताणं इत्यादि मन्त्र का स्मरण करता हुआ आ रहा था, पाप के उदय से भूखे व्याघ्र ने खा लिया, मन्त्र के प्रभाव से समाधिमरण कर सौधर्म स्वर्ग में महा ऋद्धिधारी देव हुआ।
णमोकार
पञ्चनमस्कार मन्त्र का स्मरण कर जहाजों में फूँक मारी तो जहाज चल पड़े, जो क्षुद्र देव थे वे मन्त्र के प्रभाव से नष्ट हो गये।
णमोकार
जिनालय के कपाट देव भी खोलने में समर्थ नहीं हैं फिर मनुष्यों की क्या बात है? श्रीपाल जी ने पञ्चनमस्कार का स्मरण कर कपाटों का स्पर्श किया और कपाट खुल गये।
णमोकार
विद्याधर जी से पूँछा मन्दिर कितनी दूर है? सत्ताईस बार णमोकार पढ़ने में जितना समय लगता है अर्थात् बाल्यवस्था से ही णमोकार के संस्कार थे।
णमोकार
कोई मुनि यदि मरण काल में एक बार भी अरहन्तों को नमस्कार करता है, तो वह संसार का नाश करता है, जैसे अकेला सूर्य अन्धकार का नाश करता है।
णमोकार