Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
णमोकार

इस असार एवं दुःख पूर्ण संसार में अनन्त अवसर्पिणी-उत्सर्पिणी काल व्यतीत हो गए, उन समस्त कालों में यही मन्त्रराज महत्त्वपूर्ण रहा है अर्थात् अतीत काल में जिन भव्य प्राणियों ने मुक्ति पाई है, विदेहादिक से वर्तमान काल में पा रहे हैं, पाँच भरत और पाँच ऐरावत क्षेत्र से भविष्यत् काल में मुक्ति पायेंगे, यह सब मन्त्रराज का ही प्रभाव जानना चाहिए।

In this insubstantial, sorrow-filled world, infinite descending and ascending cycles of time have passed, and in all those ages this King of Mantras has remained supreme; that is, the worthy beings who attained liberation in the past, those attaining it now in the present from Videha and other regions, and those who will attain it in the future from the five Bharat and five Airavat regions — all this should be known as the very power of the King of Mantras.

— आराध्य सूत्र · उमास्वामि श्रावकाचार · #1963

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णमोकारमन्त्र के एक अक्षर का भी भक्ति पूर्वक नाम लेने से सात सागर के पाप कट जाते हैं, पाँच अक्षरों का उच्चारण करने से पचास सागर के पाप कट जाते हैं तथा पूर्ण मन्त्र का उच्चारण करने से पाँच सौ सागर के पाप कट जाते हैं। सागर का दृष्टान्त– १. सुमेरु पर्वत पर कोई चिड़िया आकर चोंच घिसे और सौ-सौ वर्ष बाद पुनः आ-आकर चिड़िया एक-एक बार चोंच घिसे ऐसा करने पर जितने समय में सुमेरु पर्वत पूरा घिस जाये उससे भी बड़ा एक सागर का काल होता है। २. समुद्र के एक ओर जुआँरी डाली जाए और दूसरी ओर से सेल डाला जाये, जितने समय में लहराते-लहराते जुआँरी सेल में अपने आप घुस जाये उससे भी बड़ा एक सागर का काल होता है।
णमोकार
जो श्रद्धावान, जितेन्द्रिय, भव्य श्रावक एकाग्रचित्त हो सुगन्धित श्वेत पुष्पों से विधिपूर्वक सर्वभय नाशक णमोकार का 'एक लाख जाप' करता है, वह प्राणी 'त्रिलोकपूज्य तीर्थंकर पद' को प्राप्त करता है।
णमोकार
जिन्होंने पञ्चपरमेष्ठियों के नाम से उत्पन्न समस्त विघ्नों को हरने वाले एवं नित्य ऐश्वर्य के साधक नमस्कार मन्त्र का पूर्व में जाप किया था अथवा जो त्रिशुद्धिपूर्वक निरन्तर वर्तमान में उनका जाप करते हैं, वे ज्ञानवान् अतिशय धार्मिक पुरुष 'परलोक में त्रिलोकीनाथ' अवश्य होवेंगे।
णमोकार
जो भव्य प्राणी उठते समय, गिरते समय, विश्राम करते समय, शयन के समय, जाग्रत होने के समय, श्मसान एवं वन में, भय के अवसर पर, विकट मार्ग में, नूतन गृह प्रवेश में, हर कार्य में णमोकारमन्त्र का स्मरण करता है, उसके समस्त विघ्न दूर होकर इच्छित कार्य की सिद्धि नियम से होती है।
णमोकार