Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
Mind

मन

369 सूत्र · पृष्ठ 4 / 5

निराशावादी को हर अवसर कठिनाई दिखाई देता है, आशावादी को हर कठिनाई अवसर दिखाई देता है।
मन
जोंक खून को और चिंता बुद्धि को चूस लेती है।
मन
दुःखी रहने के दस कारण—१. देरी से सोना-देरी से उठना, २. लेन-देन का हिसाब न रखना, ३. किसी के लिए कुछ न करना। ४. स्वयं की बात को ही सत्य मानना। ५. किसी का भी विश्वास न करना। ६. कोई भी कार्य समय पर न करना, ७. बिना कारण झूठ बोलना, ८. बिना माँगे सलाह देना ९. बीते हुए सुख को बार-बार याद करना। १०. हमेशा अपने लिए सोचना।
मन
क्षुद्र बातें क्षुद्र मस्तिष्क को प्रभावित करती है।
मन
दूसरों के बारे में भाव बिगाड़ने से स्वयं का भव बिगड़ता है।
मन
मन को वश में करने का अर्थ है आकांक्षाओं को भौतिक प्रवृत्तियों से मोड़कर आत्मिक उद्देश्यों में नियोजित करना।
मन
दिमाग में विचारों का ट्राफिक जितना कम होगा, जिन्दगी का सफर उतना ही आसान होगा।
मन
एक पेड़ से लाखों माचिस की तीलियाँ बनती हैं, लेकिन एक तीली लाखों पेड़ों को जला देती है, इसी प्रकार एक नकारात्मक विचार या शक आपके लाखों सपनों को जला सकता है इसलिए सकारात्मक ही सोचें।
मन
मनुष्य की वास्तविक पूँजी धन नहीं विचार हैं।
मन
पवित्र विचार मानव जीवन की श्रेष्ठ शक्ति है।
मन
पत्थर से भी भारी होता है खोटा विचार जो हमें ले डूबता है।
मन
शुद्ध विचारों से शुद्ध और सत्य कार्य उत्पन्न होते हैं, सत्य कार्यों से शुद्ध जीवन प्राप्त होता है और शुद्ध जीवन से परमानन्द प्राप्त होता है।
मन
एक बार अशुभ विचार आने पर पूरा शरीर विषैला हो जाता है।
मन
अच्छा महसूस करो क्योंकि क्षमता का स्रोत स्वयं में है।
मन
मुस्कुराकर देखो तो सारा संसार रंगीन नजर आता है वर्ना भींगी पलकों से तो आइना भी धुँधला नजर आता है।
मन
संसार में सभी जीवों को शरीर की अपेक्षा मानसिक संताप अधिक होता है जो सही ज्ञान प्राप्त करने से खत्म हो जाता है।
मन
तन और वस्त्र की तरह भावों को भी साफ रखो।
मन
'सोचो साथ क्या जायेगा' सभी असफलताओं और बीमारियों का कारण नकारात्मक सोच है।
मन
आपके अशुभ भाव ही आपके शत्रु हैं।
मन
मन रूपी हाथी को वश में करने के लिए ज्ञान अंकुश के समान है।
मन
मैले बर्तन में डाला साफ पानी भी मैला हो जाता है, वैसे ही मैले मन में अच्छे विचार भी मैले हो जाते हैं।
मन
संसार में न कोई तुम्हारा मित्र है और न शत्रु है, तुम्हारा अपना विचार ही शत्रु और मित्र बनाने के लिए उत्तरदायी है।
मन
दूसरों में त्रुटियाँ ढूँढ़ते रहना खतरनाक आदत है इससे मन की प्रसन्नता उसी तरह नष्ट हो जाती है जैसे किसी फूल पर चलता हुआ कीड़ा उसकी पाँखुड़ियों को कुतरता चलता है।
मन
अपने विचारों को अपना कारावास मत बनाओ।
मन
शारीरिक कष्ट सह लेने से आत्मा की हानि नहीं पर मानसिक व्यथा से आत्मा और शरीर दोनों की हानि है।
मन
जिसने मन को वश नहीं किया व इन्द्रियों की दासता की, वह इस भव में दुःखी रहता है एवं उसने मनुष्य जन्म का एक दुर्लभ अवसर खो दिया है।
मन
यदि किसी ने धक्का मार दिया या उपसर्ग कर दिया तो हजारों लोग आ जायेंगे किन्तु परिणाम कलुषित हुए, जो विचारों का उपसर्ग अन्दर चल रहा है उससे सगा भाई भी नहीं बचा सकता है, आपको निज भावों की रक्षा स्वयं करनी है।
मन
तन की अशुचिता मुक्ति में बाधक नहीं मन की अशुचिता मोक्ष के लिए बाधक है।
मन
अपने मन को मंदिर बनाओ और उसमें प्रेम-प्रीति की प्रतिमा को बसाओ।
मन
किसी भी बात पर वाद-विवाद बढ़ा कि मन का संतुलन नष्ट हो जाता है।
मन
तत्त्वज्ञानी मनुष्य को बहुत भारी प्रयत्न करके वही कार्य करना चाहिए, जिससे मन की अत्यन्त निर्मल शुद्धि हो जावे।
मन
चञ्चल मन में विद्या और धर्म नहीं ठहरते हैं।
मन
चित्र अनावरण का प्रयोजन चित्त अर्थात् मन का अनावरण अर्थात् उज्ज्वलता है।
मन
इंसान का दिमाग कभी बूढ़ा नहीं होता पर आवेश, आग्रह और आशङ्का दिमाग को बूढ़ा कर देते हैं।
मन
मनुष्यों का मन ही बन्ध व मोक्ष का कारण है, घर में आसक्त मन बन्ध के लिए और तप में स्थित मन मोक्ष के लिए होता है।
मन
मन को वश में करने पर राग-द्वेष-मोह आदि सब नष्ट हो जाते हैं, अनियन्त्रित मन संसार का कारण है।
मन
मानसिक दृष्टिकोण ही जीवन में सब कुछ है। सफलता के लिए भय मुक्त होना आवश्यक है।
मन
अनाशक्ति और भूलने की क्षमता- किसी कार्य या वस्तु में ध्यान लगाने और उससे ध्यान हटाने का अभ्यास आपको साथ-साथ करना है, जीवन में सफलता पाने के लिए पुरानी अनावश्यक बातों को भुला देना महत्त्वपूर्ण गुण है, याद रखना कभी-कभी महत्त्वपूर्ण है जबकि भूल जाना ज्यादा उपयोगी होता है।
मन
चेतन मन को गन्दगी से न भरिये- सकारात्मक सोच सदैव नकारत्मक सोच पर विजयी होती है, विना माँगे सलाह न दीजिए, टीका-टिप्पणी करने से बचिए, आप जो उपदेश देना चाहते हैं उसे शब्दों में देने के बजाय अपने व्यवहार द्वारा देना उचित है, वह अधिक असर कारक व वजन दार होगा।
मन
निर्णय या चुनाव करते समय अस्थिर या चञ्चल चित्त नहीं होना चाहिए।
मन
मधुर सङ्गीत सुनिये- मन की उच्च स्थिति बनाये रखने में मधुर ध्वनि का महत्त्व है।
मन
सुन्दर चित्र और फोटो लगाइए, जैसा बनना है वैसे चित्र लगाइए, चित्र में वास्तविक कम्पन निहित है।
मन
बाह्य परिस्थितियों में तनाव पैदा करने की शक्ति नहीं- मानसिक तनाव बाह्य परिस्थितियों के कारण नहीं होता, बल्कि आपकी उनके प्रति प्रतिक्रिया के कारण होता है, आप अपनी भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को इस सीमा तक नियंत्रित कर सकते हैं कि बाहरी दुनिया में कुछ भी घटित होता रहे, पर आप पर उसका कोई प्रभाव न पड़े, इससे 'मन' दूसरों के आघातों से प्रभावहीन व स्वतन्त्र बनता है।
मन
अप्रिय घटनाओं से घबराइये मत- जब तक हम उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर नहीं समझें तब तक वे घटनाएं हमें विचलित नहीं कर सकतीं। शान्ति पूर्वक हर चीज को स्वीकार कर उसका सामना किया जा सकता है। किसी दुःखद घटना पर जरूरी ध्यान देना और उसके हानिकारक प्रभावों से बचने के लिए उपाय करना बिल्कुल अलग बात है, लेकिन जरूरत से ज्यादा चिन्ता करने और परेशान होने से समस्या खड़ी हो जाती है। यदि आप चीजों को कुछ दूर से देख सकें तो पायेंगे, कि वे चीजें उतनी भयानक नहीं है जितनी आपने उन्हें झूठे नजरिये से कल्पना करने पर पाया था।
मन
किसी की असहमति या स्वीकृति से परेशान न हो- आपको स्वीकार करने वाला व्यक्ति तकनीकी रूप से आपका मूल्याङ्कन करने के अयोग्य हो सकता है, अथवा वह आपके विरुद्ध द्वेष और विपक्षी मनोभाव रखने वाला हो सकता है, इसलिए आप उसे सही कैसे मान सकते हैं?
मन
दुश्चिन्ता न बने बाधा- दुश्चिन्ताओं से घिरा हुआ व्यक्ति अचानक ही विदारक कष्टों को झेलने के लिए मजबूर होता है।
मन
जो सङ्कटों का भविष्य दृष्टा है, वह दो बार कष्ट प्राप्त करता है, जिस दिन ज्ञात हुआ उस दिन और जिस दिन कष्ट आयेगा उस दिन।
मन
महान सोचें महान बनें- जैसी सोच होती है प्रायः वैसा ही भविष्य होता है।
मन
बाँटिए और समस्याओं पर राज्य कीजिये- भली-भाँति समझी गई समस्या आधी सुलझी हुयी होती है।
मन
निश्चित आदेश दीजिए अपने मन को- लक्ष्य के अनुरूप अपने मन से काम लें, महत्त्वाकाङ्क्षी हो, एक मात्र अधिकाधिक उपयोग हो मस्तिष्क का, ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा हो, तो मस्तिष्क पूरी तरह कार्य करता है।
मन
किसी के बारे में बुरा विचारें भी नहीं- विचार बहुत शक्ति शाली हथियार है, कोई भी व्यक्ति अच्छा बुरा जैसा करता है, उसी के अनुसार भोगेगा उसके लिए आप क्यों परेशान होते हैं?
मन
ऐसे समय भी प्रसन्नता दिखाना सीखिए जब कि आप वैसा अनुभव नहीं कर रहे हैं।
मन
अपने मस्तिष्क में केवल ऐसे ही विचार रखने हैं जो आपको प्रसन्नता का अनुभव कराएँ, न कि आपको अवांछित कष्ट प्रदान करें।
मन
थके हों, उदासीन हों, बीमार हों तो हर किसी को न बताएं।
मन
विचारों के प्रति सावधान रहिये, विचार ही वाणी, व्यवहार व चरित्र बनाते हैं।
मन
समस्या घर में नहीं है, मन में है, जो भी निराशा और चिन्ता पैदा होती है, जैसे ही मन की दशा सुधरती है, तत्काल समाधान हो जाता है।
मन
विचारों को व्यवस्थित कीजिए- प्रत्येक बात या घटना को सकारात्मक रूप से देखें चाहे वह कितनी ही दुःख पूर्ण क्यों न हो, नकारात्मक विचार मन को कमजोर बनाते हैं।
मन
मन में दूषित विचार उठते ही दिशा बदल दें अन्यथा भीतर की दिव्यता और पवित्रता खण्डित हो जाएगी।
मन
जो हम सोचते हैं वह कभी-कभी होता है पर जो नहीं सोचते हैं वह अक्सर होता है।
मन
हमारी विचार धारा ही हमें बूढ़ा या जवान बनाती है, चलता हुआ आदमी और दौड़ता हुआ घोड़ा कभी बूढ़ा नहीं होता है।
मन
इतने बड़े बनो कि चिन्ता न सताए व इतने उदार बनो कि गुस्सा न आये, दस प्रतिशत लापरवाही से नब्बे प्रतिशत चिन्ताएँ बढ़ जाती हैं।
मन
शरीर कमजोर हो और मन मजबूत हो तो काम चल जायेगा, पर मन कमजोर हो शरीर मजबूत हो तो काम नहीं चलेगा।
मन
टी.वी., फ्रिज, कूलर, ए.सी., पङ्खा आदि का रिमोट है तो मन का भी रिमोट होना चाहिए और केवल पुण्य का चैनल लगाकर रखना चाहिए।
मन
स्थान बदलने से नहीं मनःस्थिति बदलने से परिस्थिति बदल जाती है।
मन
वास्तविक दुःख की अपेक्षा कल्पित दुःख बड़ा होता है और देर तक चलता है, जैसे परीक्षा तीन घण्टे में हो जाती है किन्तु चिन्ता साल भर होती है।
मन
चिन्ता जीवन की समस्या है, चिन्तन चिन्ता का समाधान है।
मन
विचारों की दरिद्रता हमें बेचारा बना देती है। अति खुशी के वक्त वायदा और अति गुस्से में कोई निर्णय न करें।
मन
हम हीन नहीं होते, हीनता के शिकार होते हैं।
मन
बैंक-बैलेंस नहीं ब्रेन बैलेंस (मानसिक सन्तुलन) महत्त्वपूर्ण है।
मन
जब आप स्वयं पर विश्वास नहीं कर पाते तो दूसरे लोग आप पर किस आधार से विश्वास करेंगे।
मन
तनाव से दूर रहिए एवं तनावहीन दिखने का अभ्यास कीजिये।
मन
मनसे भय का भूत निकालें- मात्र भय शब्द ही व्यक्ति के शक्तिशाली मन में अजीव सी हलचल उत्पन्न कर देता है, खोजिये सर्वाधिक सताने वाले भय को, 'कीजिए वही जो सर्वाधिक डराए, जिससे डर मिट जाय'।
मन
संसार का सबसे बड़ा दिवालिया वह है जिसने धैर्य, साहस और विश्वास खो दिया है।
मन
मन का काँटा शरीर के काँटे से भी ज्यादा चुभता है।
मन
औरों की ऊँचाई देखकर स्वयं को छोटा मत समझो।
मन