Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
Mind

मन

369 सूत्र · पृष्ठ 3 / 5

दुःखी व्यक्ति ही दूसरे को दुःख देता है। पराधीन व्यक्ति ही दूसरे को अपने अधीन करता है।
मन
जो दूसरों में डर का संचार करता है, वह स्वयं सदैव डर से आतंकित रहता है।
मन
अपने अन्दर की शान्ति व शक्ति को पहचानिए इसी में भलाई है, जो बात अच्छी न लगे उस पर प्रतिक्रिया मत कीजिए, क्षण भर के लिए चुप रहिए।
मन
यदि आप अपने को तुच्छ, निर्धन क्षुद्र कीट मान बैठते हैं, तब आप वही हो जाएँगे।
मन
सृष्टि ने हर इंसान को सब कुछ समान दिया है लेकिन जिसने अपनी सोच को बड़ा रखा वह बहुत आगे निकल गया है।
मन
यदि मन का हो जाए तो अच्छा और मन का न भी हो तो भी अच्छा ऐसी जिसकी मनःस्थिति है उसे कोई घटना दुःखी नहीं कर सकती है।
मन
अपने मन को जीतने वाले समस्त संसार को जीतने वाले से अधिक बलवान हैं।
मन
संसार की ऐसी कोई समस्या नहीं जो आपके मन की शक्ति से अधिक शक्ति शाली हो।
मन
एकाग्र मन मित्र है चंचल मन शत्रु है।
मन
शुद्ध विचारों की शक्ति वचन से बहुत अधिक है। अच्छा विचार खुशबू जैसा है।
मन
जो हमारी तारीफ करते हैं उन्हें हम हमेशा पसंद करते हैं, पर जिनकी हम तारीफ करते हैं, उन्हें हम हमेशा पसंद नहीं करते हैं।
मन
चिन्ता करोगे तो भटक जाओगे, चिंतन करोगे तो भटके हुए को रास्ता दिखाओगे।
मन
यदि मन वश में हो गया तो इन्द्रियों से कभी पाप नहीं हो सकता है।
मन
विचार बीज की तरह होते हैं, जैसा बीज बोओगे वैसा-वैसा फल पाओगे।
मन
जो वर्तमान में जीते है वे सुखी होते हैं, जो भविष्य के बारे में सोचते हैं वे दुःखी रहते हैं।
मन
आकार, गति, चेष्टा, वचन, नेत्र और मुख के विकारों से छिपे हुए 'मन' का ज्ञान हो जाता है।
मन
यदि आपके विचार शुष्क, नीरस एवं अनाकर्षक हैं, तो आप किसी का मनोरंजन नहीं कर सकते, किसी को अपनी ओर आकर्षित नहीं कर सकते हैं।
मन
जब तक तुम्हें अपने लिए सुख की और दूसरे के लिए दुःख की चाह है तब तक तुम सदा दुःखी ही रहोगे।
मन
काँच का टुकड़ा टूट कर तेज धार वाला छुरा बन जाता है, वही हालत इंसान के टूटे हुए दिल की होती है।
मन
लोग प्रायः कहा करते हैं कि अपना मन शुद्ध है तो संसार के कहने से क्या होता है? यह बात केवल साधना की एकान्तिक दृष्टि से ठीक है, लोक, संग्रह की दृष्टि से नहीं।
मन
किसी बात से रोकने पर मनुष्य की आकांक्षा उसके लिए और भी अधिक बढ़ती है क्योंकि निषेध में आकर्षण होता है।
मन
बुद्धिमान मनुष्य के दिल में एक आईने की तरह सभी चीजों का बिम्ब पड़ना चाहिए पर उनमें से किसी की वजह से मैल नहीं आना चाहिए।
मन
अपने मन की गुप्त बातें किसी को न बतावें, मन के भेद दूसरे को देने वाले लोग सदा ही धोखा खाते हैं।
मन
अपने मन को जीतना कठिन है, लेकिन जब मन को जीत लिया तो सब कुछ जीत लिया, जो कि अभ्यास और वैराग्य से जीता जाता है।
मन
जैसे लाडले बच्चे का मन हमेशा अतृप्त रहता है, अतः मन को लाड़ कम करके उसे दबाकर रखना चाहिए।
मन
दूसरों के प्रति हमारी बुरी भावना होने से उनका बुरा होगा या नहीं होगा यह तो निश्चित नहीं है, पर हमारा अन्तःकरण तो मैला हो ही जायेगा।
मन
'विकल्प' बहुत हैं बिखरने के लिए 'संकल्प' एक ही काफी है सँवरने के लिए।
मन
जिन कार्यों के करने में आकुलता होती है वे कभी मत करो चाहे वे शुभ हो या अशुभ।
मन
आशावादी से पूछो तो वह कहता है–दो दिनों के बीच में एक रात होती है और निराशावादी कहता है दो रातों के बीच में एक दिन होता है।
मन
आशावादी हर कठिनाई में अवसर देखता है पर निराशावादी प्रत्येक अवसर में कठिनाइयाँ ही खोजता है।
मन
अपने दिमाग का उपयोग करते रहिए वरना आप मानसिक तौर पर आलसी हो जायेंगे।
मन
चिंताएँ, परेशानियाँ, दुःख और तकलीफें परिस्थितियों से लड़ने से दूर नहीं हो सकतीं, वे दूर होंगी अपनी भीतरी दुर्बलता दूर करने से, जिसके कारण वे पैदा हुई हैं।
मन
हम दुनिया को नहीं बदल सकते, मगर दुनिया के प्रति अपना दृष्टिकोण बदल सकते हैं।
मन
अपनी मानसिक स्थिति को सदा सहज व स्वस्थ रखिये, नहीं तो क्रिया-प्रतिक्रिया से जगत् में जीना दूभर हो जाएगा।
मन
निराशावाद भयंकर राक्षस है, जो हमारे नाश की ताक में बैठा रहता है, निराशा से ही जीवन के बहुमूल्य तत्त्व नष्ट हो जाते हैं, इससे विजय के अनेक अवसर लुप्त हो जाते हैं।
मन
निराशा उत्पन्न करने वाले लोगों, विचारों और सम्पर्कों से सदा दूर रहिए, आशा एक ज्योति है, जो घोर अंधकार में भी हमें प्रकाश के होने का संदेश देती है।
मन
यदि आप अपने को तनावपूर्ण और विलाप करता देख रहे हैं तो उसके जिम्मेदार आप स्वयं हैं, जो आपने-अपने-आपको ऐसा बनाने की स्वीकृति दे दी।
मन
आपके मन की अशान्ति बताती है कि आपका व्यक्तित्व गलत है।
मन
जवाबदारियाँ अवश्य निभाइये पर अपने मन को स्वतंत्र रखिये।
मन
हम अपने विचारों को किसी दायरे में सीमित कर अपनी क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं कर रहे हैं। ''सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग''
मन
हमारी प्रेरणा में बदलाव भय की जगह स्वप्रेरणा ही हमारी जिंदगी की अधिकतर समस्याओं का समाधान है।
मन
किसी कठिन कार्य के प्रति भी अगर शुरू से नजरिया सकारात्मक रहेगा तो आत्म विश्वास भी ऊँचा होगा फल स्वरूप कार्य योजना भी बेहतर होगी और निश्चित ही परिणाम भी सर्वश्रेष्ठ होंगे।
मन
अरे आत्मन्! तुझ पर तू ही कृपा कर सकता है, अतः अपनी ही दृष्टि में भला बनने का प्रयत्न करके अपने में प्रसन्नता प्राप्त करना चाहिए।
मन
शरीर कभी भी पूरा पवित्र नहीं हो सकता है फिर भी सभी लोग इसको पवित्र करने की कोशिश करते हैं, जबकि मन पवित्र हो सकता है पर लोग कोशिश नहीं करते हैं।
मन
जब दिमाग कमजोर होता तब परिस्थितियाँ समस्या बन जाती हैं, जब दिमाग स्थिर होता है तब परिस्थितियाँ चुनौती बन जाती हैं, जब दिमाग मजबूत होता है तब परिस्थितियाँ अवसर बन जाती है।
मन
मन को वश में करने का उपाय है रचनात्मक कार्य करें।
मन
संसार में कोई ऐसी समस्या नहीं जो आपके मन की शक्ति से अधिक शक्तिशाली हो।
मन
हार और जीत हमारी सोच पर निर्भर है, मान लिया तो हार ठान लिया तो जीत।
मन
''मुझे लोग चाहे'', यह मैं कितना चाहता हूँ परन्तु ''लोग मुझे पसंद करे'', इसके लिए मैं करता क्या हूँ। दुःख के वर्ग में जो स्थान भय का है, वही स्थान आनन्द वर्ग में उत्साह का है।
मन
मस्तिष्क इस शरीर का सबसे बड़ा कारखाना है, उसे कबाड़खाना मत बनाइये।
मन
दुष्ट विचार ही मनुष्य को दुष्ट कर्म की ओर ले जाते हैं।
मन
यदि आप अपना व्यक्तित्व प्रभावशाली बनाना चाहते हैं, अपने व्यक्तित्व में चुम्बकीय गुण लाना चाहते हैं तो आपको आज और इसी समय से अपने विचारों एवं भावनाओं को सकारात्मक बनाना होगा।
मन
यदि आपके विचार शुष्क, नीरस व अनाकर्षक है तो आप किसी को भी अपनी ओर आकर्षित नहीं कर सकते हैं।
मन
स्वच्छ मन वाला व्यक्ति दूसरों की अच्छाईयों को देखता है जबकि दूषित मन वाला बुराई ही ढूँढ़ता है।
मन
डरने वाला मौके पर ऐसे बुरे कार्य कर जाता है कि बाद में उसको ही आश्चर्य होने लगता है।
मन
जो केवल उल्लास के क्षण याद रखते हैं, वे कभी उदास नहीं रहते हैं।
मन
आनन्द अनुभूति के स्थान पर हम आनन्द के प्रदर्शन में अधिक रुचि रखते हैं जो अनुचित है।
मन
आज काम थोड़ा, शोर ज्यादा हो रहा है, होंठ हँसते हैं, मन बेचारा रो रहा है।
मन
शांत अन्तःकरण वज्रपात में भी सो लेता है।
मन
जीवन स्वयं में न तो अच्छा होता है, न बुरा, जैसा तुम इसे बना दो, यह तो वैसा ही अच्छा या बुरा बन जाता है।
मन
खान से निकले हुए सर्वोत्तम रत्न को भी सोने में जड़ने की आवश्यकता तो पड़ती ही है। उत्तेजना में विचार मन्द हो जाता है।
मन
स्फटिक मणि के समान मन के निर्मल होने पर गुरु के उपदेश या गुण चन्द्र किरणों की भाँति सरलता से प्रवेश करते हैं।
मन
पर के निमित्त अपनी निराकुलता क्यों खोते हो?
मन
शारीरिक कष्ट से आत्मा की हानि नहीं और शरीर की भी विशेष हानि नहीं पर मानसिक व्यथा से आत्मा और शरीर दोनों की हानि है।
मन
सोच बदलो सितारे बदल जायेंगे, नजर बदलो नजारे बदल जायेंगे। किश्तियाँ बदलने से क्या होता है दोस्तों, दिशा बदलो, किनारे बदल जायेंगे ॥
मन
मन पर क्या हावी है? कार्य करने का दृढ़ निश्चय या विफलता का भय?
मन
अपनी सोच को ले जाओ शिखर तक कि उसके आगे सारे सितारे झुक जायें। न बनाओ अपने सफर को किसी किश्ती का मोहताज चलो इस शान से कि तूफान भी झुक जाये।
मन
हमारे जीवन में किसी भी बात की शुरूआत हमारे विचारों से होती है।
मन
आज दुनिया की ९६ प्रतिशत दौलत सिर्फ १ प्रतिशत लोगों के पास है, इसका मूल फर्क है उन १ प्रतिशत लोगों की सोच का।
मन
जैसे पेट में छना हुआ जल डालते हैं वैसे मन में भी छने विचार डालें क्योंकि तन, मन नगरपालिका के कचरे का घर नहीं है प्रतिफल का विचार अवश्य करें। एक भी कड़वा फल नहीं आये तो मीठे फल की पहचान नहीं होगी।
मन
मन शान्त रखने के दस सूत्र—१. किसी के काम में तब तक दखल न दें जब तक की आपसे पूछा न जाये। २. उतना ही काम हाथ में लें जितना पूरा करने की क्षमता हो। ३. किसी भी काम को टाले नहीं और ऐसा कोई काम न करें, जिससे बाद में आपको पछताना पड़े। ४. दिमाग को खाली न रहने दें। ५. जो कभी बदल नहीं सकता उसे सहना सीखें। ६. स्वयं को माहौल में ढालने की चेष्टा करें। ७. जलन की भावना से बचें। ८. पहचान पाने की लालसा न रखें। ९. माफ करना और कुछ बातों को भूलना सीखें। १०. प्रतिदिन ध्यान करना सीखें।
मन
विशेष शुद्ध मन सबसे अच्छा और बड़ा तीर्थ है।
मन
मदारी बन्दर को शिक्षित कर जैसा चाहे वैसा नचा लेता है, वैसे ही मन को शिक्षित करके अपना दास बना लें फिर जैसा आदेश देंगे मन वही करेगा।
मन
जीवन में मन की शान्ति का मूल्य सम्पत्ति और स्वास्थ्य से कहीं ज्यादा है।
मन
समीचीन विचारों की पगडंडी से सिंहासन का रास्ता भी दूर नहीं होता है।
मन