Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
Diet & Ratri-bhojan

आहार

166 सूत्र · पृष्ठ 3 / 3

रविवार को नमक, सोमवार को हरी, मङ्गलवार को मीठा, बुधवार को घी, गुरूवार को दूध, शुक्रवार को दही, शनिवार को तैल का त्याग करना चाहिए।
आहार
अष्टमी चतुर्दशी आदि पर्व हरी भक्षण के नहीं हरि भजन के दिन हैं।
आहार
जिव्हा किसी को नहीं रखती, सरस को भीतर नीरस को बाहर कर देती है।
आहार
आसक्ति रहित होकर भोजन करना ही गृहस्थ की भोजन शुद्धि है।
आहार
अनशन-आहार त्याग का नाम उपवास नहीं किन्तु आहार सम्बन्धी आशा का त्याग उपवास है।
आहार
तीन प्रकार के भूखे- एक व्यक्ति की प्रतिज्ञा है, कि पूजा के विना भोजन नहीं करूँगा, वह पूजा में लीन है। एक व्यक्ति साधन सम्पन्न है, किन्तु रोगी है खा नहीं सकता। एक व्यक्ति इतना गरीब है कि उसके पास खाने को नहीं है, तीनों में अन्तर है।
आहार
उपवास के दिन जल ले लेने से उपवास का आठवा हिस्सा कम लाभ होता है।
आहार
अवमौदर्य- अवमौदर्य से भोजन की गृद्धता का अभाव, वात, पित, कफ का शमन, रोग का शमन, निद्रा विजय, स्वाध्याय, सामयिक एवं ध्यान में खेद नहीं होता गर्मी-सर्दी की बाधा नहीं होती है।
आहार
जहाँ पर कषाय और विषय के साथ आहार का त्याग किया जाता है, उसे उपवास जानना चाहिए, शेष को भूखा रहना समझना चाहिए।
आहार
आहार ग्रहण का उद्देश्य- भूख की वेदना शमन के लिए, संयम की सिद्धि के लिए, अपनी तथा दूसरों की सेवा के लिए, प्राण धारण करने के लिए तथा मुनि के छह आवश्यक कर्तव्य, ज्ञान, ध्यान आदि के लिए मुनि को आहार ग्रहण करना चाहिए।
आहार
भोजन छोड़ने का उद्देश्य- अचानक कोई मारणान्तिक पीड़ा होने पर, देव आदि के द्वारा उपसर्ग किये जाने पर, ब्रह्मचर्य को निर्मल करने के लिए, शरीर को कृश करने के लिए, तप के लिए और प्रणियों पर दया तथा समाधिमरण आदि के लिए साधु को भोजन नहीं करना चाहिए।
आहार
पानी से वाणी बने, मन को रचता अन्न। खाना पीना शुद्ध यदि, आतम सदा प्रसन्न॥
आहार
भोजन को दवा समझकर खाना जो स्वाद के वश में होकर खाते हैं, वे काम नहीं कर पाते हैं और जल्दी मर जाते हैं।
आहार
यदि मनुष्य दो साल पर्यन्त सादा भोजन और अल्प आहार करे तो उसकी कुबुद्धि नष्ट होकर एक विशेष प्रकार का तेज प्रकट होने लगेगा।
आहार
विदेश जाने पर माँ के द्वारा दिये मांस, मदिरा, अण्डे को सेवन न करने के नियमों का पालन किया था।
आहार
'जियो और जीने दो' के स्थान पर 'पियो और पीने दो' चलने लगा है।
आहार