Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
Character

चरित्र

1104 सूत्र · पृष्ठ 12 / 15

'नहीं' कहना भी सीखिए, अपना स्वतन्त्र व्यक्तित्व रखिए, जो सच्चाई की स्थिति में कठोर विरोध होने पर भी एक चट्टान की तरह खड़ा रह सके, आपका लक्ष्य दूसरों को खुश करना नहीं आत्म विकास करना होना चाहिए।
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वही जीवन सही अर्थों में सौभाग्य शाली है, जिसने मात्र स्वयं के बारे में नहीं सोचा वरन् समस्त समाज के लिए अपनी उपयोगिता सिद्ध कर दी है, अपने जीवन में ऐसे पुष्पों की फुलवारी सजाइये जिसकी सुगन्ध मात्र आपके घर की चारदीवारी तक ही सीमित न रहे बल्कि आसपास को भी लाभ दे सके।
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मनुष्य उद्यम से ही सफल होता है, धन एवं विद्या का स्थान गौण होता है।
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लेखा-जोखा रखिए प्रयासों का- आत्मसंयम, मौन, नियमितता, दृढसङ्कल्पता, मितव्ययता, उद्यमता, लगन, न्याय, परिमितता, स्वच्छता, शान्ति, पवित्रता एवं विनम्रता बनाए रखें।
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उधार ली हुई चीजों को वापस कीजिए, एवं किसी से व्यङ्ग पूर्ण वचन का उपयोग न कीजिए।
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निजी गोपनीयता का आदर कीजिए, किसी के कमरे में जाने से पहले दरवाजा खटखटाइये आज्ञा लेकर प्रवेश कीजिए।
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काम पर समय से आइये और छुट्टी से पहले मत जाइये।
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आपने जो वस्तु जिस परिस्थिति में ली है उसे उसी स्थिति में लौटाइये।
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वह ही जीवित लोक में, जिसको नहीं कलङ्क। मृतकों में नर है वही, यश जिसका सकलङ्क।।
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जो पदार्थ इस विश्व में, निश्चित उसका नाश। अतुल कीर्ति ही एक है, जिसका नहीं विनाश।।
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ऋषियों का जो वेश धर, बनता कातर दास। सिंह खाल को ओढ़कर, चरता है वह घास।।
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धर्मात्मा का रूप धर, जो नर करता पाप। झाड़ी भीतर व्याध सा, बैठा वह ले चाप (धनुष)।।
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धूर्त नहीं है त्यागता, मन से कोई पाप। पर निष्ठुर रचता बड़ा, त्याग आडम्बर आप।।
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शर (बाण) सीधा होता तथा, वक्र तमूरा आर्य। इससे आकृति छोड़कर, नर के देखो कार्य।।
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जिस बुध ने त्यागे अहो, लोक निन्द सब काम। जटा जूट अथवा उसे, मुण्डन से क्या काम।।
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व्यक्ति चेहरे के रङ्ग को नहीं बदल सकता, पर जीवन जीने के ढंग को अवश्य बदल सकता है।
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ऐश्वर्य का आभूषण सज्जनता, ज्ञान का आभूषण शान्ति, धन का आभूषण पात्रदान, शक्ति का आभूषण क्षमा, शौर्य का आभूषण वचन संयम, अध्ययन का आभूषण विनय, तप का आभूषण क्रोध न करना एवं धर्म का आभूषण निश्छलता है।
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उधार लिये वाहन के पेट्रोल की टङ्की फुल करके दीजिये।
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चेहरे से ज्यादा चरित्र को मूल्य दीजिए, व्यक्ति सुन्दर नहीं होता है, सफलता सुन्दर बना देती है।
चरित्र
अच्छे गुणों की तारीफ सभी करते हैं, पर पालन कोई-कोई करता है, जैसे फूलों का सार इत्र है, वैसे ही जीवन का सार चरित्र है।
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धन को इतना मूल्य मत दीजिए कि आप अपने चरित्र और स्वभाव को गिरवी रख बैठें।
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ओंठो से हँसना अच्छी बात है, आँखों से हँसना उससे भी अच्छी बात है पर दाँतों से हँसना अधम बात है।
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जीवन में चरित्र, हृदय में पवित्रता, वाणी में मधुरता, व्यवहार में कुशलता, प्राणियों में मित्रता और स्वभाव में नम्रता ये शुभ भावनाएं ही शुद्धाचरण हैं।
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पाप समय निर्बल बनों, धर्म समय बलवान। वैभव समय विनम्र अति, दुःख में धैर्य महान।।
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आचरण के विकास का मूल 'भाव शुद्धि' है, पहले चलना सीखो तब दौड़ना आयेगा।
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अपनी गलती के लिए न तो किसी पर दोष लगायें न बहाने बनायें।
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लोकनिन्दा का भय न हो तो मनुष्य को राक्षस बनते देर नहीं लगती है।
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किससे क्या खराब- अनुचित आहार से पेट खराब होता है, आलस्य से दिन खराब होता है, कर्कशा स्त्री से रात खराब होती है, मूर्ख पुत्र से कुल खराब होता है, झूठ बोलने से बात खराब होती है, कटु भाषण से सम्बन्ध खराब होते हैं, लोलुपता से नियत खराब होती है, अनियमितता से स्वास्थ्य खराब होता है, जरुरत से ज्यादा धन हो तो बुद्धि खराब होती है और अपने कर्तव्यों का पालन न किया जाय तो पूरा जीवन खराब होता हैं। कर्तव्य ही धर्म है, कर्त्तव्य ही पूजा है, कर्तव्य से ही उज्ज्वल भविष्य बनता हैं।
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शाम को पश्चिम में सूर्यास्त होते देखिये, और फिर सोचिए सूर्य ने पश्चिम का अनुकरण किया तो डूब गया, हम भी पाश्चात्य संस्कृति का अनुकरण करेंगें तो संसार समुद्र में डूब जायेंगे।
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कुछ लोग व्यवहार की वजह से दिल में उतर जाते हैं और कुछ लोग दिल से उतर जाते हैं।
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सज्जन गाय की तरह घास के बदले कई गुना देता है, दुर्जन सर्प की भान्ति दूध पीकर भी जहर उगलता है, फिर भी सज्जन अपना स्वभाव नहीं छोड़ते हैं।
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अन्धा वह नहीं जिसकी आँखे फूटी हैं, अन्धा वह है जो अपने दोष छिपाता है।
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प्रेम के, कृतज्ञता के, आनन्द के, दुःख के और पश्चात्ताप के आँसुओं से जीवन का बाग पनपता है।
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सुन्दर आचरण सुन्दर शरीर से अच्छा है, आत्मप्रशंसा, छोटे पन का चिन्ह है।
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गोरा रङ्ग कुछ दिन अच्छा लगता है पर अच्छा व्यवहार पूरे जीवन भर सुख और सुकून देता है।
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उच्च आकाङ्क्षा वाले व्यक्ति को नीति का ज्ञान होना चाहिए।
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मुस्कान देने वाला दरिद्र नहीं होता परन्तु पाने वाला माला-माल हो जाता है।
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मुस्कान थके हुये का विश्राम है, प्रेम की भाषा है, गुलाब सुगन्ध से, स्त्री मुस्कान से वश में करती है।
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आजीविका का साधन शरीर और चारित्र निर्माण का साधन पाठशाला है।
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अच्छा बनने के लिये अपना स्वभाव, संस्कार, आदतें, सिद्धान्त, आदर्श, बुद्धि, और भावनाओं का परीक्षण करें।
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अच्छे व्यक्तित्व को प्राप्त करने के लिये मन लगाकर पढ़ो, विवेक शक्ति विकसित करो, अपने सिद्धान्तों को स्पष्ट करो, विचारों पर काबू रखो।
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विचारों के अनुसार व्यवहार होता है, कसरत से शरीर बनता है, अभ्यास से मन विकसित होता है, दृढ़ मनोबल से व्यक्तित्व बनता है तथा आत्मविश्वास के विना मनुष्य लङ्गड़ा है।
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बुढ़ापे में खाली बैठकर भुनभुनाने की अपेक्षा उत्साह पूर्वक कुछ गुनगुनाते रहना अच्छा है।
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दुराचारी कितने भी ऊँचे वंश का क्यों न हो सदा अनादर ही पाता है।
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स्पर्धा अपने विकास में होना चाहिये किसी के ह्रास में नहीं।
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उड़ान ऊँची हो लेकिन जड़ें मजबूत होना चाहिए।
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पीछे वालों पर हँसो मत, आगे वालों से जलो मत।
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फल पाने को चेहरा नहीं चाल बदलो।
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भारतीय लोग धन से अधिक धर्म को, भोग से अधिक योग को एवं संस्कारों का आधार सदाचार को महत्त्व देते हैं।
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योग्य प्रशंसा व उत्कृष्ट कार्य करें- जब आपके कार्य व्यवहार सुरुचि पूर्ण परिष्कृत एवं विश्वसनीय होते हैं, तब प्रत्येक व्यक्ति आप से बार-बार मिलकर गौरव की अनुभूति करता है।
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आप अपने आदर्शों पर खरे उतरें- आपके लेन-देन साफ सुथरे हों, दूसरों का विश्वास अर्जित करने के लिए लेन-देन में पूरी ईमानदारी रखें।
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मूर्ति के समान मनुष्य का जीवन सभी ओर से भव्य और सुन्दर होना चाहिए।
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गलती चाहे छोटी भी क्यों न हो, उसे भुलाओ मत।
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प्रसिद्ध होने की अपेक्षा ईमानदार होना अधिक अच्छा है।
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भूल करना दोष है, भूल को दुहराना महादोष है।
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बड़प्पन बड़ा पद प्राप्त करने में नहीं बड़ा कार्य कर दिखाने में है।
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गलती कर के न झुठलायें और न छुपायें बल्कि स्वीकृति के साथ सुधारने का प्रयत्न करें।
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अनास्था और अविश्वास की लगाम हाथ में लेकर कोई भी चले नैतिकता का रथ आगे बढ़ नहीं सकता है।
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मर्यादा मनुष्य को अभाव में धैर्य प्रदान करती है, विपत्ति में कर्तव्य का विवेक जगाती है।
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बुराइयों पर सजग पहरा देना और अच्छाईयों का सम्मान करना न्याय कहलाता है।
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सरल व्यक्ति धोखा खा सकता है पर धोखा दे नहीं सकता है।
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ऐसा कोई काम मत करो जिसे छिपाने की जरूरत हो।
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गुणी व्यक्ति ऐश्वर्य के अभाव में भी धनाड्य माना जाता है।
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महत्त्वाकांक्षी नहीं महान् बनने का प्रयत्न करो।
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पहचान सिर्फ चेहरे से नहीं, चरित्र से होती है।
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जीवन में अविश्वसनीय होना सबसे बड़ा घाटा है।
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गलती एक क्षण में हो जाती है, पर उसे सुधारने में बहुत समय लगता है।
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ईमानदारी के विना दयालुता नहीं आ सकती है। पाप पाप ही है, फिर चाहे वह बड़ा हो या छोटा।
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झगड़े मिटाने के लिए जीवन में समन्वय की जरूरत है। जहाँ कथनी और करनी एक होती है उसे साधना कहते हैं।
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विश्वास के महल में सन्देह की छत न हो अन्यथा यह छिद्र बनकर हर मौसम में दुख देगी।
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गम्भीर व्यक्ति शोर नहीं मचाता, वह अपनी शक्ति और स्थिति देखकर काम करता है।
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सिद्धान्त कितने ही अच्छे क्यों न हो पर जीवन में उतारे विना सफल परिणाम नहीं मिल सकता हैं।
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गाँठ में सरलता नहीं होती है, भले ही वह कपड़े में, रस्सी में, शरीर में या विचारों में हो।
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वेश भूषा अपने आप में एक परिचय पत्र है इसलिये भोगी बनकर नहीं, योगी या उपयोगी बनकर जियें।
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सौ बार सिद्धान्तों की दुहाई देने की अपेक्षा एक बार उनका आचरण करना अच्छा है।
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