Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अहिंसा

श्रूयतां धर्म सर्वस्वं, श्रुत्वा चाप्यवधार्यतां। आत्मनः प्रतिकूलानि, परेषां न समाचरेत्।।

धर्म का सार सुनो और जीवन में उतारो, जो व्यवहार आपके लिए अच्छा नहीं लगता वैसा व्यवहार दूसरों के साथ भी कभी मत करो।

Hear the essence of dharma and take it into your life: whatever conduct you would not like done to yourself, never do such conduct to others.

— आराध्य सूत्र · #57

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