Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अहिंसा

जिनेन्द्र भगवान् ने पृथ्वी पर जीव दया की सिद्धि के लिए मोटे सूत के दुहरे वस्त्र से पानी छानने को पुण्य कहा है।

Lord Jinendra has declared filtering water through a double cloth of thick thread to be meritorious, for accomplishing compassion toward living beings on earth.

— आराध्य सूत्र · धर्मोपदेश पीयूष श्रावकाचार · #251

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वायु से ताड़ित, पत्थर तथा घटीयन्त्र से ताड़ित एवं सूर्य की किरणों से संतप्त वापिका के जल को मुनि प्रासुक मानते हैं, यद्यपि उपर्युक्त लक्षण वाला जल आगम में प्रासुक कहा गया है तथापि अत्यावश्यकता वश उससे स्नान ही करना चाहिए, उसे बिना छने पीना नहीं चाहिए। वस्त्र धोने तथा नहाने का पानी जलाशय में नहीं जाना चाहिए।
अहिंसा