Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अहिंसा

नदियों और तालाबों का जो गहरा पानी, वायु तथा घाम से अच्छी तरह स्पृष्ट है, उस जल में प्रवेश कर स्नान के योग्य नहीं माना गया है बर्तन में लेकर प्रयोग कर सकते हैं।

The deep water of rivers and ponds, well touched by wind and sun — entering into it to bathe is not considered fit; one may take it in a vessel and use it.

— आराध्य सूत्र · धर्मो. पी.श्रावका. · #257

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वायु से ताड़ित, पत्थर तथा घटीयन्त्र से ताड़ित एवं सूर्य की किरणों से संतप्त वापिका के जल को मुनि प्रासुक मानते हैं, यद्यपि उपर्युक्त लक्षण वाला जल आगम में प्रासुक कहा गया है तथापि अत्यावश्यकता वश उससे स्नान ही करना चाहिए, उसे बिना छने पीना नहीं चाहिए। वस्त्र धोने तथा नहाने का पानी जलाशय में नहीं जाना चाहिए।
अहिंसा