Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
धन

बालक का पवित्र हृदय– कौशाम्बी नगरी के राजा जयपाल के राज्य में समुद्रदत्त सेठ और समुद्रदत्ता सेठानी रहती थी, उनका सागरदत्त नाम का एक सुन्दर बालक था, पास में गोपायन दरिद्री पड़ोसी था, उसका सोमक नाम का एक पुत्र था, जो सागरदत्त के साथ हमेशा खेला करता था, एक दिन स्वर्णाभूषणों से युक्त सागरदत्त को देखकर गोपायन ने सागरदत्त को मारकर घर में गाड़ दिया, सेठ सेठानी पुत्र वियोग से बड़े दुःखी हुए, एक दिन सेठानी ने सोमक से पूँछा! बेटा तुम्हारा मित्र सागरदत्त कहाँ है, उसने कहा! हमारे घर में गड़ा है, सेठानी सुनकर मूर्च्छित हो गयी, जाकर देखा तो सागरदत्त का शव मिला, तब गोपायन को मृत्यु दण्ड मिला। मरकर नरक गया।

A child's pure heart: In the city of Kaushambi under King Jayapal lived the merchant Samudradatta and his wife Samudradatta, who had a handsome boy named Sagardatta. A poor neighbour named Gopayan had a son named Somak who always played with Sagardatta. One day, seeing Sagardatta wearing gold ornaments, Gopayan killed him and buried him in his house. The grieving parents one day asked Somak where his friend Sagardatta was; the child said, 'He is buried in our house.' The mother fainted on hearing this; going there they found Sagardatta's corpse, and Gopayan was sentenced to death. Dying, he went to hell.

— आराध्य सूत्र · #70

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लक्ष्मी हिंडोले की तरह चंचल है। विषयों से उत्पन्न हुआ सुख अंततः दुःखप्रद है। देह विपत्ति का घर है। अत्यधिक धन मृत्यु का प्रचुर साधन है। संसार अत्यधिक शोकपूर्ण है। स्त्रियाँ अनर्थ की जड़ हैं। फिर भी लोग इस घोर संसार में ही रत रहते हैं। आत्मा में रत नहीं होते यह आश्चर्य है।
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