Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 58

संस्कारों का शंखनाद

128 सूत्र · पृष्ठ 3 / 3

बच्चे वह ज्यादा सीखते हैं जो आप करते हैं बजाय उसके जो आप सिखाते हैं।
परिवार
गुरु और राजा के सामने ऊँचे आसन पर न बैठे और न ही उनके वचनों का तर्क द्वारा खंडन करें।
विनम्रता
जो श्रावक मुनि बनने के अतितीव्र भाव रखता है वही मुनि बन पाता है।
धर्म
जो वीतरागी होते हैं उन्हें शरीर और जो रागी होते हैं उन्हें आत्मा नहीं दिखती है।
अनासक्ति
जैसे आप अपनी सम्पत्ति अपने पुत्रों को सौंपते हो वैसे ही जिनशासन की सम्पत्ति सदाचरण द्वारा सौंपना चाहिए।
धर्म
शालीनता ऊँचे अध्ययन से नहीं अच्छे संस्कारों से आती है, हमारी शालीनता दूसरों के लिए आदर्श बन जाती है।
चरित्र
आज गुरु को छोड़कर शिष्य, माता-पिता को छोड़कर बेटा-बेटी क्यों भाग रहे हैं? क्योंकि जन्म तो दिया पर संस्कार नहीं दिये हैं।
परिवार
संस्कार के बिना कोई महान् नहीं बन सकता है।
चरित्र