मूर्खाः यत्र न पूज्यन्ते, धान्यं यत्र सुसञ्चितं। दाम्पत्ये कलहो नास्ति, तत्र श्रीः स्वयमागता।।
जहाँ पर मूर्खों की पूजा नहीं की जाती है, धान्य का संचय किया जाता है, दाम्पत्य जीवन में कलह नहीं है, वहाँ पर लक्ष्मी स्वयं आ जाती है।
Where fools are not honoured, where grain is well stored, and where there is no quarrel in married life — there Lakshmi (prosperity) comes of her own accord.
— आराध्य सूत्र · कण्ठाभरण श्लोक · #21
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