Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

राजकुमार वज्रबाहु की शादी मनोरमा राजकन्या से हुई थी, जब उनका साला उदयसुन्दर पहली बार बहिन को लेने आया, तो वज्रबाहु ने इस शर्त पर ले जाने की स्वीकृति दी कि हम भी साथ में चलेंगे, हाथी पर सवार होकर तीनों जा रहे थे, जङ्गल में पहुँचते ही मुनिराज के दर्शन हो गये, देखते ही वज्रबाहु के मन में वैराग्य उत्पन्न हो गया, उदयसुन्दर साले ने हँसी में कहा, जीजाजी आप दीक्षा ले लोगे तो हम भी दीक्षा ले लेंगे और छब्बीस राजाओं के साथ तीनों दीक्षित हो गये, वज्रबाहु मनोरमा के राग मे ससुराल जा रहा था क्षण भर की साधुसङ्गति से जीवन बदल गया था।

Prince Vajrabahu was married to the princess Manorama. When his brother-in-law Udaysundar first came to take his sister, Vajrabahu agreed to let her go on the condition that he too would come along. The three rode on an elephant, and upon reaching the forest they saw a great muni; at the very sight, detachment arose in Vajrabahu's heart. In jest his brother-in-law Udaysundar said, 'Brother-in-law, if you take initiation, we too will take it' — and all three, along with twenty-six kings, were initiated. Vajrabahu had been going to his in-laws' out of love for Manorama, yet a moment's company of a saint changed his life.

— आराध्य सूत्र · प.पु. · #34

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
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