Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
कर्म

रक्षक कौन- अञ्जना को उसकी सास ने घर से निकाल दिया था, जिससे वह भटकती–भटकती एक गुफा में अपनी दासी के साथ पहुँची, उसी गुफा में हनुमान जी का जन्म हुआ था, वहाँ से आकाश में जाते हुए प्रतिसूर्य विद्याधर ने गुफा में देखा, तो वह नीचे गुफा की ओर आया, और उसे अपनी बहन बनाकर अपने साथ ले जाने लगा, अञ्जना को विमान में बैठाया, हनुमान माँ की गोद में थे, अचानक माँ की गोद से नीचे गिर गये, नीचे घना जङ्गल था, सब लोग घबराए और विमान को जङ्गल में उतारा गया, सब लोग रोते हुए हनुमान की खोज करने लगे, माँ को हनुमान की आवाज आई, सुनकर पास गयी, वहाँ हनुमान एक चट्टान पर पड़े थे, जिस चट्टान पर गिरे थे उस चट्टान के टुकड़े–टुकड़े हो गये थे, और हनुमान हँस–खेल रहे थे, इतनी ऊँचाई से गिरने पर भी उनको चोट तक नहीं लगी, किसने की हनुमान की रक्षा? हनुमान के पुण्य ने।

Anjana, cast out by her mother-in-law, wandered with her maid into a cave, where Hanuman was born. The passing Vidyadhar Pratisurya saw her, made her his sister, and took her aboard his aerial chariot. Hanuman, in his mother's lap, suddenly fell into the dense forest below. All descended in alarm and searched weeping. Hearing his cry, his mother found him lying on a rock—the very rock he had struck was shattered to pieces, yet the child was laughing and playing, wholly unhurt despite the great fall. Who protected Hanuman? His own merit.

— आराध्य सूत्र · #43

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