Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

बालक वर्धमान ने स्याद्वाद सिद्ध किया- बच्चों ने माँ त्रिशला से पूँछा वर्धमान कहाँ पर हैं? माँ ने कहा ऊपर हैं, बच्चे दौड़कर तीसरी मञ्जिल में गये, वहाँ पिता सिद्धार्थ विराजमान थे, बच्चों ने पिताजी से पूँछा कि वर्धमान कहाँ पर हैं, पिताजी बोले नीचे हैं, बच्चे दूसरी मञ्जिल पर गये, वर्धमान से कहा आपके माता–पिता झूठे हैं, वर्धमान ने कहा नहीं, दोनों सही हैं, माँ की अपेक्षा ऊपर हैं, और पिता की अपेक्षा नीचे हैं, यही स्याद्वाद कहलाता है।

Children asked mother Trishala where Vardhaman was; she said 'upstairs.' They ran to the third floor where father Siddharth was, who said Vardhaman was 'downstairs.' Going to the second floor, they told Vardhaman his parents had lied. He replied, 'No, both are right—relative to Mother I am above, relative to Father I am below.' This is what is called syadvada (the many-sided view).

— आराध्य सूत्र · #41

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
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