अरतिकरं भीतिकरं, खेदकरं वैर शोक कलहकरं। यदपरमपि तापकरं, परस्य तत्सर्वमप्रियं ज्ञेयं।।
जो वचन दूसरे जीवों को अप्रीति, भय, खेद, वैर, शोक तथा कलह कारक एवं अन्य भी सन्ताप कारक हों वे सभी अप्रिय वचन जानना चाहिए। ये सभी प्रकार के वचन असत्य के अन्तर्गत आते हैं इन वचनों को नहीं बोलना चाहिए।
Words that cause displeasure, fear, grief, enmity, sorrow and quarrel to others, and any that cause them anguish, should all be known as unkind words. All such words fall under falsehood and should not be spoken.
— आराध्य सूत्र · #11
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