उत्तमे तु क्षणं कोपः, मध्यमे स्यात् मुहूर्तकं। जघन्ये स्यादहोरात्रं, चाण्डाले मारणान्तिके।।
उत्तम प्रकृति के पुरुष क्षण भर क्रोध करते हैं, मध्यम प्रकृति के एक मुहूर्त, जघन्य प्रकृति के चौबीस घण्टे और चाण्डाल प्रकृति के मर जाते है पर क्रोध नहीं छोड़ते हैं।
The noble-natured are angry only for a moment, the middling for a muhurta, the low-natured for twenty-four hours, and the outcaste-natured die but do not give up their anger.
— आराध्य सूत्र · #54
–