Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

कषायैः रञ्जितं चेतस्तत्त्वं नैवावगाहते। नीली रक्तेम्बरे रागो दुराधेयो हि कौंकुमः।।

कषाय से अनुरञ्जित चित्त में तत्त्व अवगाहित नहीं होता जैसे नीले रङ्ग के वस्त्र में कुमकुम का रङ्ग चढ़ता नहीं है।

A mind coloured by the passions cannot absorb the truth, just as the red of kumkum will not take hold on a cloth already dyed blue.

— आराध्य सूत्र · स्व.सं. · #53

इसी विषय के और सूत्र

सभी क्षमा →
कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा