Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 29

विनम्रता का द्वार, करे जग से उद्धार

145 सूत्र · पृष्ठ 3 / 3

अज्ञानी मिथ्यादृष्टि ही परमेष्ठी की अवज्ञा करता है।
विनम्रता
जितनी जिनवाणी-जिनदेव के प्रति विनय होती है उतनी ही जिनेश्वर के लघुनन्दन मुनिराज की विनय करना चाहिए।
विनम्रता
शिक्षा का फल विनय है, विनय का फल सर्व कल्याण, विनय से संयम, तप, ज्ञान की वृद्धि होती है।
विनम्रता
जितनी विनय असंयमी संयमी की करता है उससे अधिक विनय संयमी को अपने संयम की करना चाहिए।
विनम्रता
फल युक्त वृक्ष और कुलीन मनुष्य नम्र होते हैं परन्तु सूखे वृक्ष और मूर्ख मनुष्य कभी नम्र नहीं होते हैं।
विनम्रता
जहाँ दूसरे को समझाना कठिन हो वहाँ अपने मन को समझाना चाहिए। जीवन की सफलता का सही निशान है कि व्यक्ति कोमल बनता जाता है।
विनम्रता
सभ्यता का स्वरूप सादगी है, अपने लिए कठोरता दूसरों के लिए उदारता होना चाहिए।
विनम्रता
नम्रता कठोरता से अधिक शक्तिशाली है, जल चट्टान से अधिक शक्तिशाली है एवं प्रेम बल से अधिक शक्तिशाली है।
विनम्रता
दूसरों का सत्कार करना ही सज्जनों की सम्पत्ति होती है।
विनम्रता
विनीत व्यक्ति को धर्म-अर्थ-काम-यश और मोक्ष भी मिलता है।
विनम्रता
महात्माओं के चरित्र विचित्र होते हैं, वे लक्ष्मी की परवाह नहीं करते परन्तु लक्ष्मी के पास होने पर वे अधिक नम्र हो जाते हैं।
विनम्रता
महान् और सच्चे व्यक्ति सदा सरल और विनम्र होते हैं।
विनम्रता
जो आदमी दूसरों के भावों का आदर करना नहीं जानता है, उसे दूसरे से भी सद्भावना की आशा नहीं करनी चाहिए।
विनम्रता
दूसरों की आध्यात्मिकता का हृदय से आदर करने से ही मनुष्य में आध्यात्मिकता उत्पन्न होती है।
विनम्रता
प्रत्येक व्यक्ति की बात सुनो पर किसी से कुछ मत कहो, प्रत्येक व्यक्ति द्वारा निंदा सुन लो पर अपना निर्णय सुरक्षित रखो।
वाणी
वासनाओं में लिपटे लोग इस योग्य नहीं कि हम उनके सामने भक्ति से सर झुकाये, वैराग्य और परमात्मा से दिल लगाना ही वे महान् गुण हैं जिनकी चौखट पर बड़े-बड़े वैभवशाली और प्रतापी लोगों के सिर भी झुक जाते हैं।
अनासक्ति
अभिमान से किसका पतन नहीं हो सकता? नम्रता से किसकी उन्नति नहीं हो सकती ?
विनम्रता
गुणी व्यक्ति को आता देखकर प्रसन्न होना चाहिए तथा आदर करना चाहिए फिर समादृत गुणी व्यक्ति उसके सुख के लिए चेष्टा करते हैं।
विनम्रता
डॉक्टर का उचित सम्मान करो, उन लाभों के लिए जो तुम डॉक्टर से प्राप्त कर सकते हो।
विनम्रता
जो मनुष्य दूसरों पर दया करता है, वह स्वयं अपना हित करता है, पर निर्दयी मनुष्य स्वयं अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारता है।
अहिंसा
नम्रता से बहुत से काम बन जाते हैं, जो कठोरता से नहीं बनते हैं।
विनम्रता
स्वाभिमानी होना अच्छा है, परन्तु स्वाभिमान से विनम्रता श्रेष्ठ है।
विनम्रता
किसी महान् व्यक्ति की प्रथम परीक्षा उसकी विनम्रता है।
विनम्रता
जो काम स्त्री का सौन्दर्य करके दिखा सकता है, वही नम्रता कर सकती है उसका प्रभाव तत्काल ही दूसरों पर पड़ता है।
विनम्रता
जिनमें नम्रता नहीं आती, वे विद्या का पूरा सदुपयोग नहीं कर सकते हैं।
विनम्रता