Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 28

क्षमा

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क्षमा करने से पिछला समय तो नहीं बदलता लेकिन भविष्य सुनहरा हो जाता है।
क्षमा
जो पहले क्षमा माँगता है वह सबसे बहादुर है, जो सबसे पहले क्षमा करता है वह सबसे शक्तिशाली है, जो सबसे पहले भूल जाता है वह सबसे सुखी होता है।
क्षमा
क्षमा से टूटे दिल फिर से जुड़ जाते हैं और जीवन की गाड़ी पुनः प्रेम की पटरी पर दौड़ने लगती है।
क्षमा
वात्सल्य के बिना क्षमा नहीं हो सकती है।
क्षमा
तप करते जो भूख सहें वे ऋषि उच्च महान्। क्षमा शील के बाद ही, पर उनका सम्मान। अत्यन्त क्रोधी स्वभाव का नेत्रधारी भी अंधा ही होता है।
क्षमा
कुपित व्यक्ति की पहले विद्या धुँधली हो जाती है और बाद में भृकुटी टेढ़ी हो जाती है। प्रजा का कोप सब कोपों से बड़ा होता है।
क्षमा
अनंत दुष्टों में से मैं कितनों को मार सकूँगा ? किन्तु क्रोध को चित्त में मार देने से मैंने सभी शत्रु मार दिये।
क्षमा
क्रोध के लक्षण शराब और अफीम दोनों से मिलते हैं, शराबी की भाँति क्रोधी मनुष्य भी पहले आवेश वश लाल-पीला होता है, फिर आवेश के मन्द पड़ जाने पर भी यदि क्रोध न घटा तो वह अफीम का काम करता है और मनुष्य की बुद्धि को मन्द कर देता है, अफीम की तरह वह दिमाग को कुतर कर खा जाता है।
क्षमा
क्रोध बैर का अचार या मुरब्बा है।
क्षमा
मौन वह मंत्र है जिसके आगे क्रोध की सारी शक्ति विफल हो जाती है।
क्षमा