Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
Effort & Diligence

पुरुषार्थ

637 सूत्र · पृष्ठ 5 / 9

बदल जाओ वक्त के साथ या फिर वक्त को बदलना सीखो, मजबूरियों को मत कोसो हर हाल में चलना सीखो।
पुरुषार्थ
जो वक्त पर पसीना नहीं बहाते वे बाद में आँसू बहाते हैं।
पुरुषार्थ
जीवन में एक बार जो फैसला कर लिया तो फिर पीछे मुड़कर मत देखो क्योंकि पलट-पलट कर देखने वाले इतिहास नहीं बनाते हैं।
पुरुषार्थ
आप यह मत सोचो कि अकेले क्या कर सकते हैं, जरा देखो उस सूरज को जो अकेला चमकता है।
पुरुषार्थ
लक्ष्य पर आधे रास्ते तक जाकर कभी वापस न लौटें क्योंकि वापस लौटने पर भी आधा रास्ता पार करना पड़ता है।
पुरुषार्थ
जिन्हें सपने देखना अच्छा लगता है उन्हें रात छोटी लगती है और जिन्हें सपने पूरे करना अच्छा लगता है उन्हें दिन छोटा लगता है।
पुरुषार्थ
किसी मकसद के लिए खड़े हो तो पेड़ की तरह, गिरो तो बीज की तरह जिससे दुबारा उठकर उसी मकसद के लिए पुरुषार्थ कर सको।
पुरुषार्थ
जिन्दगी जीना आसान नहीं होता, बिना संघर्ष कोई महान् नहीं होता, जब तक न पड़े हथौड़ी की चोट तब तक पत्थर भी भगवान् नहीं होता।
पुरुषार्थ
आप अपने जीवन में विशुद्धि और उत्साह शक्ति को भंग मत करना क्योंकि इसी से लौकिक और पारमार्थिक दोनों कार्यों में सफलता मिलती है।
पुरुषार्थ
साधना का अर्थ अपने समय, श्रम और साधनों का कण-कण उपयोग करना है।
पुरुषार्थ
श्रम करने वालों के जीवन में उदासी और निराशा का कोई स्थान नहीं रहता है और वे ही समाज में स्वतंत्रता, समता, बन्धुता विकसित करते हैं।
पुरुषार्थ
श्रम से ही कृषि से लेकर उद्योगों तक उन्नति हुई और समुद्र की गहराइयों से लेकर अन्तरिक्ष की ऊँचाईयों तक व्यक्ति पहुँचा है।
पुरुषार्थ
श्रम से पराधीनता कम हो जाती है और आत्म विश्वास जागता है।
पुरुषार्थ
श्रम से व्यक्तिगत जीवन में उन्नति होती है एवं जीवन स्तर ऊँचा उठता है।
पुरुषार्थ
अपनी शक्ति को छोटा न समझें, एक छोटी-सी चिंगारी भी विशाल वन को जलाकर राख कर सकती है। आत्मशक्ति भोग से नहीं योग से प्राप्त होती है।
पुरुषार्थ
इंसान होकर हम हार क्यों मानें जब बहती नदी ने आज तक नहीं पूछा कि समुद्र कितनी दूर है।
पुरुषार्थ
पराजय तब नहीं होती जब आप गिर जाते हैं, पराजय तब होती है जब आप उठने से इंकार कर देते हैं। जो झिझकता है वह हारता है।
पुरुषार्थ
मनुष्य धन के द्वारा अधिक जीता है। विद्या से सुख पूर्वक जीता है। शिल्प से थोड़ा जीता है। बिना कर्म के मनुष्य जीवित ही नहीं रहता है
पुरुषार्थ
काम करने वाला मरने से कुछ घंटे पूर्व ही बूढ़ा होता है।
पुरुषार्थ
उद्योग से दरिद्रता नहीं रहती है। आत्म चिन्तन से पाप नहीं रहता है।
पुरुषार्थ
परिश्रम हर सफलता की कुंजी है और परिश्रम ही प्रतिभा का पिता है।
पुरुषार्थ
राम ने सुग्रीव से पूछा कि लंका कितनी दूर है? सुग्रीव ने उत्तर दिया स्वामी! आलसियों के लिए बहुत दूर है, पर उद्यमशील के हाथ के पास ही है।
पुरुषार्थ
उत्साह बलवान होता है, उत्साह से बढ़कर कोई बल नहीं है।
पुरुषार्थ
आलस्य सुख रूप प्रतीत होता है परन्तु उसका अन्त दुःख है तथा कार्य दक्षता दुःख रूप प्रतीत होती है परन्तु उससे सुख का उदय होता है।
पुरुषार्थ
ऐश्वर्य, लक्ष्मी, लज्जा, धृति और कीर्ति ये कार्य दक्ष पुरुष में ही निवास करते हैं, आलसी में नहीं।
पुरुषार्थ
आलसी और अनुद्योगी के सौ वर्ष के जीवन से दृढ़ उद्योग करने वाले के जीवन का एक दिन श्रेष्ठ है।
पुरुषार्थ
उद्योगी के घर में ऋद्धि-सिद्धि पानी भरती हैं।
पुरुषार्थ
सौभाग्य न होना किसी के लिए दोष नहीं है, समझकर सत्प्रयत्न न करना ही दोष है।
पुरुषार्थ
जिसके जीवन में प्रयत्नशीलता नहीं है, वह या तो पशु है या मुक्त है।
पुरुषार्थ
हमारा महान् गौरव कभी भी न गिरने में नहीं है, अपितु जब भी गिरें तो हर बार उठने में है।
पुरुषार्थ
यह कहना कि 'जब सब करेंगे तब हम करेंगे', न करने का बहाना है, हमें ठीक लगता है यह इसलिए हम करें, जब दूसरों को ठीक लगेगा तब वे करेंगे।
पुरुषार्थ
कार्य करने वाले में थोड़ा कट्टरपन हुए बिना तेजस्वी कार्य नहीं हो सकता है।
पुरुषार्थ
सदा दक्ष, उद्योग परायण और स्वयं काम करने वाला बनें। अपने सभी कर्त्तव्यों के पालन करने में दूसरे को अवकाश नहीं देना चाहिए।
पुरुषार्थ
सुनने वाले लाखों है, सुनाने वाले हजारों हैं, समझने वाले सैकड़ों हैं परन्तु करने वाले कोई विरले ही हैं, सच्चे पुरुष वे ही हैं और सच्चा लाभ भी उन्हीं को प्राप्त होता है, जो करते हैं।
पुरुषार्थ
विघ्न के भय से कोई काम न करना कायरता का लक्षण है।
पुरुषार्थ
यदि तुम्हारा लक्ष्य महान् हो और तुम्हारा साधन सामान्य हो तो भी कार्य करो क्योंकि केवल कार्य के द्वारा ही तुम्हारे साधनों में वृद्धि हो सकती है।
पुरुषार्थ
योग्य पुरुषों के लिए कोई भी कार्य अत्यन्त कठिन नहीं होता है, उद्योगी मनुष्यों के लिए कोई स्थान दूर नहीं होता है, विद्वानों के लिए कोई देश विदेश नहीं होता है, प्रिय वचन बोलने वाले के लिए कोई व्यक्ति पराया नहीं होता है।
पुरुषार्थ
काम में देरी न होना कार्य-सिद्धि का ही लक्षण है।
पुरुषार्थ
मनुष्य प्रायः क्षोभ से अपने पराक्रम को प्राप्त होता है।
पुरुषार्थ
त्रुटियाँ तो केवल उसी से नहीं होगी जो कभी कोई काम करे ही नहीं, सर्वोत्तम मनुष्य त्रुटियों से ढलकर ही निकलते हैं।
पुरुषार्थ
वह मनुष्य जो गलतियाँ नहीं करता है, प्रायः कुछ नहीं कर पाता है।
पुरुषार्थ
कोई भी व्यक्ति अनेक और बड़ी गलतियाँ किए बिना कभी महान् नहीं बना है।
पुरुषार्थ
सद्गुणों की साधना का कार्य भुजाओं से सागर तैरने जैसा है।
पुरुषार्थ
जब पड़ाव दूर हो तो रुक-रुक कर चलना चाहिए।
पुरुषार्थ
जो ईश्वर की आराधना के साथ-साथ पुरुषार्थ करते हैं उनके दुःख और दारिद्रय दूर होते हैं और ऐश्वर्य बढ़ता है।
पुरुषार्थ
जिनके भाग्य में विनाश लिखा है, उनकी टालमटोल, विस्मृति, सुस्ती और निद्रा-ये चार निकृष्ट नौकायें हैं।
पुरुषार्थ
जो लोग हल के सहारे जीते हैं, वास्तव में वे ही जीते हैं और सब लोग तो दूसरे की कमाई हुई रोटी खाते हैं।
पुरुषार्थ
युवा लोग किसी कार्य की समाप्ति पर थक जाते हैं और वृद्ध कार्य के प्रारम्भ में ही थक जाते हैं।
पुरुषार्थ
असफलता केवल यह सिद्ध करती है कि सफलता का प्रयत्न पूरे मन से नहीं हुआ है।
पुरुषार्थ
असफलताएँ कभी-कभी सफलता का आधार होती हैं, यदि हम अनेक बार भी असफल होते हैं तो कोई बात नहीं, प्रयत्न करके असफल हो जाने की अपेक्षा प्रयत्न न करना अधिक अपमानजनक है।
पुरुषार्थ
मनुष्य सफलता से कम असफलता से ज्यादा सीखता है।
पुरुषार्थ
जिसके पास उम्मीद है, वह लाख बार हार कर भी नहीं हारता है।
पुरुषार्थ
जो व्यक्ति अपने सामने कोई बड़ा उद्देश्य नहीं रखता है, वह जीवन भर केंचुए की ही चाल में रेंगता रह जाता है।
पुरुषार्थ
संकट उपस्थित होने पर भी जिसकी बुद्धि विचलित नहीं होती है वह कार्य में सफल हो जाता है।
पुरुषार्थ
अपने लक्ष्य को न भूलो अन्यथा जो कुछ मिलेगा, उसी में संतोष मानने लगोगे।
पुरुषार्थ
जिसका उद्देश्य ऊँचा है उसे आराम तलवी और लोकप्रियता से बचना चाहिए।
पुरुषार्थ
लक्ष्य हीन जीवन भटकाव भरा होता है अतः लक्ष्य अवश्य बनायें।
पुरुषार्थ
सफलता एक ऐसी सीढ़ी है, जिस पर तुम अपने हाथ जेब में डालकर नहीं चढ़ सकते हो।
पुरुषार्थ
यदि तुम जीवन में सफलता पाना चाहते हो तो धैर्य को अपना घनिष्ठ मित्र, अनुभव को अपना परामर्श दाता, सावधानी को अपना बड़ा भाई और आशा को अपनी संरक्षक प्रतिभा बना लो।
पुरुषार्थ
उत्तम कार्य चाहते हो तो स्वयं करो।
पुरुषार्थ
काम करके कुछ उपार्जन करना शर्म की बात नहीं, दूसरों का मुँह ताकना शर्म की बात है।
पुरुषार्थ
प्रतिष्ठा, आलसियों और अपाहिजों की तरह दूसरों के बल पर जीने में नहीं है, वह है अपना काम स्वयं करने में और सच्चाई–ईमानदारी से अपना पसीना बहाकर रोटी कमाने में।
पुरुषार्थ
वही सच्चा साहसी है, जो कभी निराश नहीं होता है।
पुरुषार्थ
साहस गया कि मनुष्य की आधी समझदारी उसके साथ गई।
पुरुषार्थ
साहस का टॉनिक बेहतरीन मानसिक औषधि है।
पुरुषार्थ
जितने महान् कार्य साहस के बल पर किए जाते हैं, उतने केवल बुद्धिमत्ता के बल पर नहीं किए जाते हैं।
पुरुषार्थ
शिक्षित बनना प्रत्येक मनुष्य के अपने हाथ की बात है, केवल सच्ची लगन तथा इच्छा शक्ति की दृढ़ता की ही आवश्यकता है।
पुरुषार्थ
यदि तुम एक भी दिन व्यर्थ नष्ट किए बिना समस्त जीवन सत्कर्म करने में बिताते हो, तो तुम आगामी जन्म–मरण का मार्ग बन्द किए देते हो।
पुरुषार्थ
साहसी पुरुष पराजित होने पर भी निरुत्साहित नहीं होते है हाथी तीखे बाणों के गहरे आघात होने पर भी अपने पैरों को और भी दृढ़ता से जमा देता है।
पुरुषार्थ
यह काम अशक्य हैं, ऐसा कहकर किसी भी काम से पीछे न हटो; क्योंकि पुरुषार्थ प्रत्येक काम में सिद्धि देने की शक्ति रखता है।
पुरुषार्थ
किसी काम को अधूरा मत छोड़ो क्योंकि अधूरा काम करने वालों को जगत् में कोई नहीं चाहता है।
पुरुषार्थ
जो सुख की चाह न कर कार्य को चाहता है; वह मित्रों का ऐसा आधार स्तम्भ है, जो मित्रों के दु:ख के आँसुओं को पोंछेगा।
पुरुषार्थ
आपत्तियों को जो 'आपत्ति' नहीं समझते, वे आपत्तियों को ही आपत्ति में डालकर वापस भेज देते हैं।
पुरुषार्थ
जब आपने अपनी सारी बुद्धिमत्ता से एक काम करने की ठान ली है, तो डगमगाना नहीं चाहिए, बल्कि लक्ष्य को शक्ति से प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।
पुरुषार्थ
ऐसे कार्यों के करने में जुट जाओ, जो अन्त में प्रसन्नता बढ़ाते है, चाहे तुम्हें ऐसा करने में अनेक कठोर दु:खों की पीड़ा उठानी पढ़े, अपने हृदय को कड़ा करो और अन्त तक दृढ़ रहो।
पुरुषार्थ