Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
Character

चरित्र

1104 सूत्र · पृष्ठ 4 / 15

साख है तो सब कुछ खास है, साख नहीं तो सब राख है।
चरित्र
जीते जी कद्र करो, अर्थी उठाते वक्त तो नफरत करने वाले भी रो पढ़ते हैं।
चरित्र
कर्म कलंक तो छूट जाते हैं पर अपयश का कलंक नहीं छूटता है।
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यह सच है कि छोटा आदमी बड़े मौके पर काम आता है और बड़ा आदमी छोटी-सी बात पर औकात दिखा जाता है।
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गुणी लोग दोषों को भी गुण रूप से ग्रहण करते हैं और दोषी लोग गुणों को भी दोष रूप से ग्रहण करते हैं।
चरित्र
चित्त की पवित्रता से चारित्र में पवित्रता आती है। चरित्रवान के साथ दुनिया होती है।
चरित्र
मानस की सबसे बड़ी आवश्यकता शिक्षा नहीं चारित्र है क्योंकि यही सबसे बड़ा रक्षक है। चारित्र के बिना व्यक्तित्व खोखला है।
चरित्र
छोटे-छोटे प्रलोभनों का आकर्षण चारित्र को गिरा देता है।
चरित्र
चारित्र जीवन में शासन करने वाला तत्त्व है और वह प्रतिभा से उच्च है। चारित्र की तलवार के साथ वैराग्य की ढाल होना परमावश्यक है।
चरित्र
जिसका चारित्र शुद्ध है उसकी समाधि भी श्रेष्ठ होती है।
चरित्र
यदि धन नष्ट हुआ तो कुछ नहीं हुआ, यदि स्वास्थ्य नष्ट हुआ तो कुछ नष्ट हुआ, यदि...
चरित्र
जो लोग अपने कर्त्तव्य को जानते हैं और अपनी योग्यता बढ़ाना चाहते हैं, उनकी दृष्टि में सभी अच्छे कार्य कर्तव्य स्वरूप हैं।
चरित्र
सार्वजनिक प्रेम, सलज्जता का भाव, सबके प्रति सद्व्यवहार, दूसरों के दोषों को ढाँकना और सत्य प्रियता ये पाँच भाव शुभाचरण रूपी भवन के आधारस्तम्भ हैं।
चरित्र
योग्य पुरुष की योग्यता तब किस काम की, जबकि वह अपने को क्षति पहुँचाने वालों के साथ भी सद्व्यवहार नहीं करता है।
चरित्र
करुणा, बुद्धि और शुभ संस्कारों के मेल से ही मनुष्य में प्रसन्नता उत्पन्न होती है।
चरित्र
रेती तीक्ष्ण भी हो पर वह युद्ध में लाठी से बढ़कर नहीं हो सकती है इसी प्रकार आचरण हीन मनुष्य विद्वान् भी हो फिर भी वह सदाचारी से बढ़कर नहीं होता है।
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योग्य पुरुषों का लजाना उन कामों के लिए होता है जो उनके अयोग्य होते हैं इसलिए वह सुन्दर स्त्रियों की लज्जा से सर्वथा भिन्न है।
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आहार, वस्त्र और सन्तान इन बातों में तो सभी मनुष्य समान हैं, यह तो एक लज्जा की ही भावना है जिससे मनुष्य में पात्रता और योग्यता वास करती है।
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लज्जाशीलता क्या सत्पात्रों के लिए रत्न के समान नहीं? और जब वे उससे रहित होते हैं तब उनकी शेखी और श्रेष्ठता क्या देखने वाली आँखों को पीड़ा पहुँचाने वाली नहीं होती है?
चरित्र
जो लोग दूसरों का अपमान देखकर भी उतने ही लज्जित होते हैं, जितना कि स्वयं अपने अपमान से उन्हें लज्जा आती है वे ही लोग लज्जा और संकोच की मूर्ति कहलाते हैं।
चरित्र
ऐसे साधनों के सिवाय कि जिनसे उन्हें लज्जित न होना पड़े, अन्य साधनों के द्वारा योग्य व्यक्ति राज्य तक पाने के लिए मना कर देते हैं।
चरित्र
निर्दयी लोग जीवित होकर भी मरे के समान हैं, डोरी के द्वारा चलने वाली कठपुतलियों की तरह उनमें भी एक प्रकार का कृत्रिम जीवन ही होता है।
चरित्र
खुद कमाना और खुद खाना प्रकृति है, दूसरों से छीनकर खाना विकृति है और स्वयं कमाना तथा दूसरों को खिलाना संस्कृति है।
चरित्र
संसार एक प्रतिध्वनि है। जो बोलोगे वही आपके पास वापस लौटकर आएगा प्रेम दोगे तो प्रेम पाओगे घृणा दोगे तो घृणा पाओगे।
चरित्र
दुष्ट पुरुषों का बल है ‘हिंसा’, राजाओं का बल है दण्ड देना, स्त्रियों का बल है सेवा अथवा रोना, सत्पुरुषों का बल है धन, असफल व्यक्तियों का बल है धैर्य, गुणवानों का बल है क्षमा, संतों का बल है साधना।
चरित्र
विपत्ति में धैर्य, अभ्युदय में क्षमा, सभा में वाक्पटुता, युद्ध में विक्रम, यश में अभिरुचि और ज्ञान का व्यसन; ये महापुरुषों के स्वाभाविक गुण हैं।
चरित्र
हमारी सोच पर निर्भर करता है कि हम कमियों को नजर अंदाज कर उस व्यक्ति की अच्छाइयों को कितना उजागर करते हैं?
चरित्र
आम आदमी को अपनी विचारधारा बदलनी होगी और ऐसे संगठनों से कारोबार करना होगा जहाँ भ्रष्टाचार और अनैतिकता न हो। यही समस्या का समाधान है।
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प्रतिभा को तलाशना और प्रतिमा को तराशना अन्यथा जिंदगी 'लाश' से ज्यादा कुछ नहीं है।
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संसार एक प्रतिध्वनि है। जो बोलोगे वही आपके पास वापस लौटकर आएगा प्रेम दोगे तो प्रेम पाओगे घृणा दोगे तो घृणा पाओगे।
चरित्र
दुष्ट पुरुषों का बल है 'हिंसा', राजाओं का बल है दण्ड देना, स्त्रियों का बल है सेवा अथवा रोना, सत्पुरुषों का बल है धन, असफल व्यक्तियों का बल है धैर्य, गुणवानों का बल है क्षमा, संतों का बल है साधना।
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भारत के साधु यदि नशेबाजी और दुर्व्यसनों का त्याग कर देश के रचनात्मक कामों में लग जाएँ, तो वे जनता को अपने पक्ष में कर सकते हैं।
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जो व्यक्ति स्वभाव से धैर्यवान है, वह महान् विपत्ति के समय भी अधीर नहीं होता, संकट के समय धैर्य धारण करना मानो आधी लड़ाई जीत लेना है, अपने धैर्य के बिना और कोई संकट से मनुष्य का उद्धार नहीं कर सकता, सज्जनों का धन तो धैर्य ही है जिसके पास धैर्य है, वह जो भी इच्छा करता है उसे प्राप्त कर सकता है।
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विपत्ति में धैर्य, अभ्युदय में क्षमा, सभा में वाक्पटुता, युद्ध में विक्रम, यश में अभिरुचि और ज्ञान का व्यसन; ये महापुरुषों के स्वाभाविक गुण हैं।
चरित्र
जीवन में कोई विपत्ति आये तो कोई आपत्ति मत कीजिए, उसका धैर्यपूर्वक सामना कीजिए, दूध फटने पर वे ही लोग उदास होते हैं, जिन्हें रसगुल्ले बनाने नहीं आते हैं।
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दुःख में कभी घबराओ मत और सुख में कभी इतराओ मत।
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अज्ञानी दुःखों से डरता है, ज्ञानी दुःख में धैर्य धारण करता है।
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दुःख सभी को होता है, पर दुःख को दुःख मानकर भी जो उसे सहने की शक्ति रखते हैं, उनके लिए दुःख भी सुख हो जाता है।
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महात्मा पुरुष सब कुछ नष्ट हो जाने पर भी खिन्न नहीं होते हैं।
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कष्ट और विपत्ति मनुष्य को शिक्षा देने वाले श्रेष्ठ कारक हैं।
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धैर्य और धर्म की परीक्षा संकट में होती है।
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धैर्यहीन मनुष्य तेलरहित दीपक के समान निन्दनीय है।
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धैर्य और शान्ति कठिनाइयों के बादलों को बिखेर देती है।
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सम्पूर्ण बल मिलकर एक धैर्य की बराबरी नहीं कर सकते हैं।
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मुसीबतें टूट पड़ें, हाल बेहाल हो जाए, तो भी जो लोग निश्चय से डिगते नहीं और धीरज रखकर चलते हैं वे ही सच्चे धैर्यशाली हैं।
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धैर्य और संतोष जीवन-नौका के वे पतवार हैं जो नौका को मंजिल तक ले जाते हैं।
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धैर्य व साहस संसार की हर आपत्ति का उपचार हैं।
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निराशा धैर्य को समाप्त कर देती है।
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धीरज से कमजोर आदमी को भी बल मिलता है बेसब्री से शक्ति बर्बाद होती है।
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बिना निराश हुए पराजय को सहन कर लेना, इस धरा पर साहस की सबसे बड़ी परीक्षा है।
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निर्भय का लोहा शत्रु भी मानता है।
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बुद्धि की स्थिरता के बिना भी आदर्श पूरा नहीं होता है।
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संसार में आधे से अधिक सक्षम लोग तो इसलिए असफल हो जाते हैं क्योंकि समय पर उनमें साहस का संचार नहीं हो पाता और वे भयभीत हो उठते हैं।
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बाधाओं और विरोधों से भयभीत न हो।
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जिसके पास मनोबल नहीं उसके पास कुछ नहीं, यहाँ तक कि मनुष्यता भी नहीं है।
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विपदाओं के समूह बाढ़ की लहरों के समान आया करते हैं, धीर पुरुष उन्हें चट्टान की तरह सहता रहे, तो वह धीरे-धीरे आप ही चले जाते हैं।
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हमारी जितनी मानसिक और शारीरिक शक्तियाँ हैं आत्मविश्वास उन सबका सरदार है।
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जब सामने आई परिस्थिति का सामना करना तय है तो क्यों न धैर्य एवं साहस से सामना किया जाए।
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जगत् में कुछ मानव ऐसे भी होते हैं, जो पेड़-पौधों की तरह सब कुछ सहन कर पाते हैं।
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साहस गया कि आधी समझदारी भी उसके साथ चली जाती है।
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धीरज की चाल धीमी पर फल मीठा होता है।
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खुद पर भरोसा करना कोई परिंदों से सीखे क्योंकि जब वो शाम को वापस घोंसलों में जाते हैं तो उनकी चोंच में कल के लिए कोई दाना नहीं होता है।
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हमारी सोच पर निर्भर करता है कि हम कमियों को नजर अंदाज कर उस व्यक्ति की अच्छाइयों को कितना उजागर करते हैं?
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पूछे गये हर प्रश्न का उत्तर मिले, जरूरी नहीं।
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सब कुछ खोने से बुरा क्या है? वो उम्मीद खोना जिसके भरोसे सब कुछ वापस पा सकते हैं। दुर्घटना को भी अवसर बनाना सीखना है, गिरो तो कुछ उठाकर ही उठना है।
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फैसला फासले से बेहतर होता है।
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दुनिया विरोध करे तुम डरो नहीं क्योंकि लोग फल-फूल से लदे वृक्ष को ही पत्थर मारते हैं।
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जो परिस्थितियों से सामंजस्य करना जानता है, प्रसन्नता परछाई की तरह उसका साथ देती है।
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सब्र और सच्चाई एक ऐसी सवारी है जो अपने सवार को गिरने नहीं देती ना किसी के कदमों में और न किसी की नजरों में।
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साहस मानवीय गुणों में प्रमुख है क्योंकि वह बाकी सभी गुणों की गारंटी देता है, साहस सिर्फ खड़े होकर बोलना ही नहीं, बैठकर धैर्यपूर्वक सुनना भी है।
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कटा हुआ वृक्ष भी बढ़ता है, क्षीण हुआ चन्द्रमा भी पुनः बढ़कर पूरा हो जाता है, इस बात को समझकर सन्त पुरुष अपनी विपत्ति में घबराते नहीं हैं।
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आपत्ति पड़ने पर जो घबराता नहीं है, वह कल्याण को प्राप्त करता है।
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अज्ञानी लोग छोटे काम ही आरम्भ करते हैं और अत्यन्त व्यग्र हो जाते हैं, बुद्धिमान लोग महान् कार्य हाथ में लेते हैं परन्तु व्याकुल नहीं होते हैं।
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दुःख आ पड़ने पर मुस्कुराओ उसका सामना करके विजयी होने का साधन इसके समान और कोई नहीं है।
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जो लुट जाने पर भी मुस्कुराता है, वह चोर का दिल चुरा लेता है।
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