कीचड़ सने झाड़ू से घर साफ नहीं होता उसी प्रकार कषायों से सनी आत्मा को सुख नहीं मिलता है। क्षमा 0 – भेजें
जब मन्द कषाय होती है तब तत्त्व विचार होता है, तत्त्व चिन्तन में मन न लगे तो तीव्र कषाय समझना चाहिए, तीव्र कषाय के उदय में देशना लब्धि नहीं होती है। क्षमा 0 – भेजें
क्षमा- एक अंग्रेज ने गाँधी जी के गाल पर चाँटा मारा तो गाँधीजी ने अपना दूसरा गाल आगे कर दिया, तो इसे देखकर वह पानी पानी हो गया था। क्षमा 0 – भेजें
पण्डित गोपालदास जी की पत्नी का तेज स्वभाव था, अपशब्दों के साथ कभी-कभी मार-पीट भी कर देती थी, लोगों ने कहा पण्डितजी इनका स्वभाव ठीक कर दो, पण्डितजी कहते थे भैया, ये हमारे परिणामों की परीक्षिका है, हममें कितना आत्म बल है, ये परीक्षा लेती हैं, मुझे क्रोध करने का क्या अधिकार है। क्षमा 0 – भेजें