Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

पण्डित गोपालदास जी की पत्नी का तेज स्वभाव था, अपशब्दों के साथ कभी-कभी मार-पीट भी कर देती थी, लोगों ने कहा पण्डितजी इनका स्वभाव ठीक कर दो, पण्डितजी कहते थे भैया, ये हमारे परिणामों की परीक्षिका है, हममें कितना आत्म बल है, ये परीक्षा लेती हैं, मुझे क्रोध करने का क्या अधिकार है।

Pandit Gopaldas ji's wife was fiery by nature and would sometimes even beat him along with harsh words. People said, 'Pandit ji, correct her temper.' The Pandit would say, 'Brother, she is the examiner of my dispositions; she tests how much inner strength I have. What right have I to be angry?'

— आराध्य सूत्र · #10

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा