Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

जब मन्द कषाय होती है तब तत्त्व विचार होता है, तत्त्व चिन्तन में मन न लगे तो तीव्र कषाय समझना चाहिए, तीव्र कषाय के उदय में देशना लब्धि नहीं होती है।

When the passions are mild, reflection on truth arises; if the mind does not settle in contemplation of truth, know the passions to be intense. In the rise of intense passion, the attainment of the teaching (deshana labdhi) does not occur.

— आराध्य सूत्र · #38

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा