Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

ग्रन्थ की समाप्ति सिद्ध क्षेत्र या अतिशय क्षेत्र पर करते थे, धर्म के प्रति अगाढ़ श्रद्धा थी, एक बार सोनागिर जी गये, दर्शन स्तुति के बाद, एक पद बड़ी मधुर वाणी में पढ़ना प्रारम्भ किया 'नाथ सुधि लीजो जी म्हारी भव-भव दुखिया जानके' इस पद को पढ़ते जाते अविरल अश्रु धारा बहती गयी, ऐसी भक्ति देख लोग गद-गद हो गये थे।

He would complete his study of a scripture at a Siddha-kshetra or a place of miracles, for he had profound faith in Dharma. Once he went to Sonagiri; after darshan and praise he began to sing a hymn in a most sweet voice — 'O Lord, take heed of me, knowing me wretched through birth after birth' — and as he sang, an unbroken stream of tears flowed. Seeing such devotion, people were deeply moved.

— आराध्य सूत्र · #1

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति