भक्ति गुरु कहते हैं–तुम्हारी जैसी अर्जी, प्रभु की वैसी मर्जी। The Guru says—as is your plea, so is the Lord's will. — आराध्य सूत्र · #66 0 – भेजें 🖼️ इमेज सेव करें · Save image card
हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो। भक्ति 0 – भेजें
छने, निर्मल और समीचीन मन्त्र से पवित्र किए हुए जल से जिनपूजा के लिए, विधि पूर्वक प्रतिदिन स्नान करना चाहिए। वह जल नाली आदि में नहीं जाना चाहिए। भक्ति 0 – भेजें
स्त्री समागम, आहार, मल विसर्जन तथा आरम्भादि में लीन रहने वाला और अशुद्ध वस्तुओं को स्पर्श करने वाला गृहस्थ स्नान कर तथा धुले हुए पवित्र वस्त्र धारण कर ही पूजा करें। भक्ति 0 – भेजें
संसार के काम में तो नफा और नुकसान दोनों होते हैं, पर भगवान् के काम में नफा-ही-नफा होता है, नुकसान होता ही नहीं है। भक्ति 0 – भेजें